CJP Junaid Bhai: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर 49 दिनों तक चले छात्र आंदोलन में हर दिन हजारों छात्र शामिल हुए। आंदोलन के दौरान कई नेता और छात्र प्रतिनिधि मंच से संबोधित करते रहे, लेकिन एक ऐसा नाम भी सामने आया जिसने कभी माइक नहीं संभाला, फिर भी आंदोलन के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल हो गया। यह नाम है गाजियाबाद निवासी मोहम्मद जुनैद, जिन्हें प्रदर्शनकारी ‘जुनैद भाई’ के नाम से जानते हैं।
पर्दे के पीछे संभालते रहे पूरी व्यवस्था
मोहम्मद जुनैद CJP के किसी बड़े पद पर नहीं थे। वह एक स्वयंसेवक के रूप में आंदोलन से जुड़े थे। उनकी जिम्मेदारी धरना स्थल पर मौजूद छात्रों और प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन, पीने का पानी, दवाइयों और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था करना था। लगातार 49 दिनों तक उन्होंने अपनी टीम के साथ यह सुनिश्चित किया कि धरने पर बैठे लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
अंतिम चरण में अचानक सुर्खियों में आया नाम
आंदोलन के आखिरी दिनों में मोहम्मद जुनैद का नाम अचानक राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया। जुनैद और उनके परिवार ने आरोप लगाया कि आंदोलन से जुड़े होने के कारण उत्तर प्रदेश में उनके घर पर पुलिस पहुंची। परिवार के अनुसार, गाजियाबाद स्थित उनके घर की तलाशी ली गई और उनके पिता मुस्तफा से पूछताछ की गई। परिवार का यह भी दावा था कि बैंक पासबुक, पैन कार्ड समेत कुछ दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए गए।
मेरठ पुलिस ने आरोपों से किया इनकार
परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि मेरठ में रहने वाले उनके रिश्तेदारों को भी परेशान किया गया। हालांकि, मेरठ पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जिले के किसी भी थाने में ऐसी कार्रवाई का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है। इस घटनाक्रम के बाद मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया।
बिना प्रचार के निभाई अहम भूमिका
आंदोलन के दौरान जहां कई चेहरे लगातार मीडिया और मंच पर दिखाई दिए, वहीं जुनैद पूरी तरह व्यवस्थाओं में जुटे रहे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि धरना स्थल पर भोजन, पानी और अन्य जरूरी इंतजाम सुचारु रूप से चलाने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। इसी कारण सोशल मीडिया पर भी ‘जुनैद भाई’ का नाम तेजी से चर्चा में आया।
सरकार के आश्वासन के बाद खत्म हुआ आंदोलन
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार की ओर से परीक्षा सुधार, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों की वापसी तथा अन्य प्रमुख मांगों पर सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद CJP ने अपना 49 दिनों का आंदोलन समाप्त कर दिया। इसके साथ ही जंतर-मंतर का धरना भी खत्म हो गया।
आंदोलन के पीछे काम करने वालों की भी रही अहम भूमिका
धरना समाप्त होने के बाद भी ‘जुनैद भाई’ की कहानी चर्चा में बनी हुई है। यह कहानी बताती है कि किसी भी बड़े आंदोलन की सफलता केवल मंच पर बोलने वाले नेताओं से नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे काम करने वाले स्वयंसेवकों के योगदान से भी जुड़ी होती है। भोजन, पानी और जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था करने वाले ऐसे लोगों की भूमिका आंदोलन की रीढ़ मानी जाती है।









