E10 Petrol: भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन और आर्थिक मामलों के विभाग के सलाहकार आकाश पूजारी ने E20 पेट्रोल को लेकर अहम सुझाव दिया है। दोनों ने कहा है कि पुराने वाहनों के मालिकों को राहत देने के लिए पेट्रोल पंपों पर E20 के साथ E10 भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उनका कहना है कि इससे पुराने वाहनों को लेकर पैदा हुई चिंता कम हो सकती है।
पुराने वाहन बड़ी चुनौती
E20 पेट्रोल में 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल होता है, जबकि E10 में एथेनॉल की मात्रा 10% रहती है। सलाहकारों के मुताबिक देश में करीब 7.5 से 8 करोड़ पुराने दोपहिया वाहन हैं, जिनमें कई पुराने कार्ब्यूरेटर सिस्टम पर चलते हैं। इन वाहनों के कुछ रबर सील और दूसरे हिस्से ज्यादा एथेनॉल वाले ईंधन के लिए डिजाइन नहीं किए गए थे। इसलिए रेट्रोफिटिंग पूरी होने तक E10 उपलब्ध रखना व्यावहारिक विकल्प हो सकता है।
E20 पर क्या कहा
आर्थिक सलाहकारों ने यह भी स्पष्ट किया कि E20 से इंजन को बड़े पैमाने पर नुकसान होने के दावों के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। हालांकि, पुराने वाहनों के कुछ हिस्सों और उनकी ईंधन प्रणाली को लेकर अलग तरह की चिंताएं हैं। उनका सुझाव है कि सरकार उपभोक्ताओं को ईंधन का विकल्प दे और पुराने वाहनों के लिए रेट्रोफिट कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाए।
E30 पर खाद्य संकट
सलाहकारों ने E20 से आगे एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने को लेकर भी सावधानी बरतने की बात कही है। उनका कहना है कि E27 या E30 जैसे ऊंचे ब्लेंड की दिशा में बढ़ने से कृषि संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है। गन्ना, मक्का और चावल जैसी फसलों का ज्यादा हिस्सा ईंधन उत्पादन में जाने पर खाद्य कीमतों, पशु चारे और पानी की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।
खाद्य बनाम ईंधन
मामला केवल पेट्रोल तक सीमित नहीं है। एथेनॉल उत्पादन के लिए कृषि भूमि, फसल और पानी की जरूरत होती है। सलाहकारों के मुताबिक अगर ईंधन की मांग के लिए फसलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल बढ़ता है तो देश को ‘फूड बनाम फ्यूल’ की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार एक सीजन में करीब 30 लाख टन चीनी एथेनॉल उत्पादन की ओर डायवर्ट की गई थी।
सरकार की नीति क्या है
फिलहाल सरकार की ओर से E10 को सामान्य बाजार में दोबारा लाने का कोई फैसला घोषित नहीं हुआ है। जुलाई में सरकार ने E20 को वैज्ञानिक रूप से सुरक्षित बताते हुए कहा था कि फिलहाल 20% से ज्यादा एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने का निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसे में मुख्य आर्थिक सलाहकार का सुझाव E20 नीति पर चल रही बहस को और महत्वपूर्ण बना देता है।









