Fake Army Officer: फर्जी ब्रिगेडियर बनकर लोगों के बीच पहचान बनाने वाले आर्यन वर्मा मामले में अब जांच और गहराई से की जा रही है। पुलिस के साथ-साथ सेना की खुफिया टीम भी इस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। जांच एजेंसियों को शक है कि यह मामला केवल फर्जी वर्दी या पद का दिखावा करने तक सीमित नहीं हो सकता। इसलिए अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कहीं इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो काम नहीं कर रहा था।
सेना में भर्ती के नाम पर गुमराह करने का शक
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या आर्यन वर्मा युवाओं को सेना में भर्ती कराने या मेडिकल कोर में सीधे अधिकारी बनाने का झांसा देता था।
अधिकारियों को आशंका है कि वह खुद को प्रभावशाली सैन्य अधिकारी बताकर लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश करता था। इसी वजह से उसके संपर्कों और गतिविधियों को बारीकी से खंगाला जा रहा है।
लैपटॉप और मोबाइल की हो रही जांच
पुलिस ने आरोपी के पास से बरामद लैपटॉप और मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए हैं। इन दोनों उपकरणों में मौजूद जानकारी की जांच की जा रही है। पुलिस अधीक्षक सौरभ दीक्षित के अनुसार, डिजिटल डेटा की मदद से यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि आरोपी किन लोगों के संपर्क में था। सोशल मीडिया अकाउंट, चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और ऑनलाइन बातचीत की भी जांच की जा रही है।
फिलहाल शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि आर्यन शौकिया तौर पर खुद को ब्रिगेडियर बताता था। हालांकि एजेंसियां किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं कर रही हैं।
आरएनआर संस्थान का भी आया नाम
पूछताछ के दौरान आर्यन वर्मा ने आरएनआर नाम के एक संस्थान का जिक्र किया है। वह लोगों से दावा करता था कि इस संस्थान के जरिए मेडिकल कोर में सीधे ब्रिगेडियर बनाया जाता है। अब पुलिस इस संस्थान की सच्चाई और उसके अस्तित्व की भी जांच कर रही है। अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि यह संस्था वास्तव में मौजूद है या फिर लोगों को गुमराह करने के लिए इसका नाम लिया जाता था।
अधिकारियों को भी दिखाता था रौब
जांच में यह जानकारी भी सामने आई है कि आर्यन ने अपनी मां के विभागीय काम से जुड़े एक बीईओ को भी कथित तौर पर धमकाया और दबाव बनाने की कोशिश की थी।
इस खुलासे के बाद जांच एजेंसियां यह भी जानने की कोशिश कर रही हैं कि उसने अपने कथित सैन्य पद का इस्तेमाल और किन-किन जगहों पर किया।
जेल भेजा गया आरोपी
पुलिस आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद जेल भेज चुकी है। वहीं सेना और अन्य जांच एजेंसियां पूरे मामले की अलग-अलग पहलुओं से जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल जांच और पूछताछ के बाद कई और महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। फिलहाल जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या उसके साथ कोई और भी जुड़ा हुआ था।


