FSSAI Action: पनीर, दूध से लेकर पैकेज्ड फूड तक, गलत ‘हेल्दी’ दावे करने वालों पर होगी कार्रवाई

FSSAI खाद्य सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू करने की तैयारी में है। असुरक्षित भोजन पर जेल, गलत दावों पर कार्रवाई, एनालॉग पनीर पर संभावित बैन और ऑनलाइन फूड की जानकारी को अनिवार्य बनाने की दिशा में काम हो रहा है।

FSSAI Food Safety Rules

Food Safety Connect app: देश में खाने-पीने की चीजों में मिलावट और उनकी गुणवत्ता को लेकर बढ़ती चिंता के बीच FSSAI ने खाद्य सुरक्षा के नियमों को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया है। FSSAI के CEO राजित पुनहानी ने बताया कि संस्था का मुख्य काम सुरक्षित भोजन के मानक तय करना है। इसके लिए अलग-अलग खाद्य पदार्थों से जुड़े 21 साइंटिफिक पैनल काम करते हैं। पेस्टिसाइड, कलर, मीट, फिश, वेजिटेबल ऑयल समेत कई चीजों के मानक इन्हीं के जरिए तय किए जाते हैं। इन नियमों को जमीन पर लागू करने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य सरकारों की है। देश में करीब 75 लाख फूड लाइसेंस हैं, जिनमें 74 लाख से ज्यादा लाइसेंस राज्यों के पास हैं।

मिलावट पर सख्ती

राज्य के फूड सेफ्टी अधिकारी खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करते हैं और जरूरत पड़ने पर सैंपल जांच के लिए लैब भेजते हैं। FSSAI के पास करीब 250 लैब और लगभग 300 मोबाइल लैब हैं। यदि किसी खाद्य पदार्थ को स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित पाया जाता है तो उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है और जेल की सजा का प्रावधान भी है। वहीं, अगर किसी प्रोडक्ट पर पांच ग्राम प्रोटीन लिखा है लेकिन जांच में सिर्फ दो ग्राम मिलता है या पोषण संबंधी जानकारी गलत दी गई है, तो इसे मिसब्रैंडिंग या सब-स्टैंडर्ड माना जा सकता है। ऐसे मामलों में जनविश्वास कानून के बाद आपराधिक कार्रवाई की जगह पेनल्टी का प्रावधान है। FSSAI का कहना है कि कार्रवाई और सजा की प्रक्रिया भी जल्द पूरी होनी चाहिए, ताकि लोगों को कार्रवाई का असर दिखाई दे।

पनीर पर बड़ा फैसला

दिल्ली के साथ देश के दूसरे हिस्सों में बिकने वाला एनालॉग पनीर भी FSSAI की चिंता का विषय बना हुआ है। संस्था ने संकेत दिया है कि इसके इस्तेमाल को पूरी तरह रोकने की दिशा में काम चल रहा है और जल्द ही इस पर बैन की घोषणा की जा सकती है। खुले में बिकने वाले दूध, पनीर, खोया और दाल जैसी चीजों की निगरानी की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। FSSAI इनके लिए मानक तय करता है, जबकि राज्यों के फूड कंट्रोल विभाग बाजार और अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर की जांच करते हैं। रेस्टोरेंट भी मुख्य रूप से राज्य सरकारों के दायरे में आते हैं।

जंक फूड पर नजर

बच्चों में मोमो, पिज्जा, बर्गर और दूसरे जंक फूड के बढ़ते चलन को लेकर भी FSSAI काम कर रहा है। अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की पहचान के लिए फैट, नमक और चीनी की मात्रा को आधार बनाकर ड्राफ्ट तैयार किया गया है। इस पर आम लोगों और अन्य स्टेकहोल्डर्स से 60 दिनों के भीतर सुझाव मांगे गए हैं। FSSAI का कहना है कि किसी खाने को ‘सेफ’ होने का मतलब यह नहीं कि उसे ज्यादा खाना भी स्वास्थ्य के लिए बेहतर है। इसी वजह से ‘ईट राइट इंडिया’ जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं। पैकेज्ड फूड के फ्रंट पर चेतावनी संकेत और QR कोड के जरिए पूरी जानकारी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है।

ऑनलाइन फूड नियम

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिकने वाले खाद्य उत्पादों की जानकारी को लेकर भी FSSAI सख्त रुख अपना रहा है। ऑनलाइन दिखाई देने वाले प्रोडक्ट में मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट स्पष्ट रूप से दिखनी चाहिए। इसके लिए ई-कॉमर्स कंपनियों को 30 सितंबर तक का समय दिया गया है। FSSAI गलत तरीके से किसी प्रोडक्ट को ‘हेल्दी’ बताने वाले विज्ञापनों पर भी कार्रवाई करेगा। उदाहरण के तौर पर अगर किसी उत्पाद को 100 फीसदी शहद बताया जाए, जबकि वह पूरी तरह शहद न हो, तो इसे गलत दावा माना जा सकता है। पाम ऑयल को लेकर भी FSSAI ने कहा है कि इसे खतरनाक नहीं माना गया है, लेकिन तेल का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए।

शिकायत कैसे करें

अगर किसी व्यक्ति को खाने में मिलावट या खाद्य सुरक्षा से जुड़ी समस्या दिखाई देती है तो वह ‘Food Safety Connect’ ऐप के जरिए शिकायत कर सकता है। शिकायत के साथ प्रोडक्ट की फोटो भी अपलोड की जा सकती है। इसके बाद शिकायत संबंधित राज्य के फूड सेफ्टी कमिश्नर को भेजी जाती है और करीब 30 दिनों में जवाब देने की कोशिश की जाती है। रेस्टोरेंट की रसोई की सफाई जांचने के लिए हाइजीन चेकलिस्ट और स्कोरिंग सिस्टम भी मौजूद है। इसके अलावा FSSAI ऐसी ‘मैजिक बॉक्स’ तकनीक पर काम कर रहा है, जिससे आम ग्राहक खुद भी खाद्य पदार्थों की शुरुआती जांच कर सके। संस्था लोगों को ‘ईट राइट थाली’, ‘आयुर्वेद आहार’, ‘हर लेबल कुछ कहता है’ और ‘नो टू अडल्टरेशन’ जैसे अभियानों के जरिए सुरक्षित और बेहतर भोजन चुनने के लिए जागरूक कर रही है।

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