India EU Trade Deal: भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच होने वाला व्यापार समझौता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि दोनों की अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ देखा जाए, तो ये वैश्विक जीडीपी का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। वहीं अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी दोनों की हिस्सेदारी काफी बड़ी है। ऐसे में यह समझौता दुनिया के व्यापारिक माहौल पर बड़ा असर डाल सकता है।
भारतीय कंपनियों को मिलेगा बड़ा फायदा
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, इस समझौते के बाद भारत से यूरोप भेजे जाने वाले लगभग 93 प्रतिशत उत्पादों को बिना अतिरिक्त शुल्क के बाजार में प्रवेश मिल सकेगा। इसका सीधा फायदा भारतीय कंपनियों को होगा, क्योंकि उन्हें अपने उत्पाद बेचने के लिए भारी कर नहीं देना पड़ेगा। इससे कपड़ा उद्योग, चमड़ा कारोबार, रत्न एवं आभूषण क्षेत्र और इंजीनियरिंग उत्पाद बनाने वाली कंपनियों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। शुल्क कम होने से भारतीय सामान यूरोपीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी और किफायती बन जाएगा।
उपभोक्ताओं को भी होगा लाभ
इस समझौते का फायदा केवल कारोबारियों तक सीमित नहीं रहेगा। यूरोप के कई प्रीमियम और लग्जरी ब्रांड भारतीय ग्राहकों के लिए पहले से अधिक सुलभ हो सकते हैं। इससे देश में प्रीमियम कार, फैशन और अन्य उपभोक्ता उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावना है।भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया के कई बड़े देश भारत के साथ व्यापार समझौते करने में रुचि दिखा रहे हैं। अमेरिका के साथ भी व्यापार को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत चल रही है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जल्द भारत आकर दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग को लेकर चर्चा करेंगे।
वहीं कनाडा भी भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। दोनों देशों के बीच बातचीत का अगला चरण पूरा हो चुका है और इस वर्ष समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश की जा रही है।
निवेशकों के लिए क्या है अवसर?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से उन कंपनियों को सबसे अधिक फायदा होगा, जिनका कारोबार निर्यात पर आधारित है। इससे भारतीय शेयर बाजार में भी सकारात्मक माहौल बन सकता है। निर्यात बढ़ने से विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा और देश की आर्थिक स्थिति को अतिरिक्त सहारा मिलेगा।
आने वाले समय में दिखेगा असर
जब इस समझौते की सभी औपचारिकताएं पूरी हो जाएंगी, तब ऑटोमोबाइल, मैन्युफैक्चरिंग, आयात-निर्यात और कई अन्य क्षेत्रों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच भारत एक भरोसेमंद आर्थिक साझेदार के रूप में उभर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि को नई गति देने में मददगार साबित हो सकता है।


