Governors Reshuffle In India: देश में राज्यपालों और उपराज्यपालों के पद पर बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। राष्ट्रपति ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सी.वी. आनंद बोस का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही कई राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति की गई है और कुछ मौजूदा राज्यपालों को दूसरे राज्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस फैसले के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस फेरबदल को काफी अहम माना जा रहा है। सरकार ने कई अनुभवी नेताओं और पूर्व अधिकारियों को अलग-अलग राज्यों में नई जिम्मेदारियां दी हैं।
कई राज्यों में बदले राज्यपाल
इस फेरबदल के तहत हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला को अब तेलंगाना का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वहीं तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को महाराष्ट्र का नया राज्यपाल बनाया गया है। बिहार के वरिष्ठ भाजपा नेता नंद किशोर यादव को नागालैंड का राज्यपाल बनाया गया है। वहीं सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन को बिहार का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि को अब पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को तमिलनाडु के राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है।
दिल्ली और लद्दाख में भी बदलाव
राज्यपालों के साथ-साथ उपराज्यपाल पद पर भी बदलाव किया गया है। लद्दाख के उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता को हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है।
दिल्ली के मौजूदा उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को अब लद्दाख का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। वहीं पूर्व राजनयिक तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उपराज्यपाल बनाया गया है।
कौन हैं तरनजीत सिंह संधू
तरनजीत सिंह संधू को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करीबी माना जाता है। वह एक अनुभवी राजनयिक रहे हैं। साल 2020 से 2024 तक उन्होंने अमेरिका में भारत के राजदूत के रूप में काम किया। करीब 35 साल के अपने कूटनीतिक करियर में उन्होंने भारत और अमेरिका के रिश्तों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसके अलावा वह श्रीलंका में भारत के हाई कमिश्नर और जर्मनी में कॉन्सुल जनरल भी रह चुके हैं।
नागालैंड के नए राज्यपाल
नंद किशोर यादव बिहार की राजनीति का जाना-पहचाना नाम हैं। वह बिहार विधानसभा के पूर्व स्पीकर भी रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने बिहार सरकार में मंत्री के रूप में भी काम किया है। वह बिहार भाजपा के अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं।
नंद किशोर यादव सात बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने 2025 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा था। उसी समय से यह चर्चा शुरू हो गई थी कि उन्हें किसी बड़ी संवैधानिक जिम्मेदारी दी जा सकती है।
अन्य नेताओं का अनुभव
शिव प्रताप शुक्ला उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से आते हैं। वह मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में वित्त राज्यमंत्री रह चुके हैं और चार बार विधायक भी चुने गए हैं।
विनय कुमार सक्सेना कॉर्पोरेट और सामाजिक क्षेत्र का जाना-माना नाम हैं। उन्होंने खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) का नेतृत्व भी किया था।
वहीं कविंद्र गुप्ता जम्मू-कश्मीर के वरिष्ठ नेता रहे हैं और 2018 में राज्य के डिप्टी सीएम भी रह चुके हैं।
कुल मिलाकर देश में राज्यपालों और उपराज्यपालों की यह नई नियुक्तियां प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

