बचत खाता रखने वाले ग्राहकों के लिए मिनिमम बैलेंस का नियम अक्सर परेशानी का कारण बन जाता है। खाते में तय औसत न्यूनतम बैलेंस नहीं रहने पर बैंक शुल्क काट सकते हैं, लेकिन इसके लिए बैंक मनमाने तरीके से कोई भी पेनाल्टी नहीं लगा सकता। भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने ऐसे शुल्क लगाने के लिए स्पष्ट नियम तय किए हैं।
पहले देनी होगी सूचना
RBI के नियमों के मुताबिक, अगर खाते में तय न्यूनतम बैलेंस नहीं रहता है तो बैंक को ग्राहक को SMS, ईमेल या पत्र के जरिए इसकी जानकारी देनी होती है। ग्राहक को बैलेंस पूरा करने के लिए नोटिस की तारीख से कम से कम एक महीने का समय देना जरूरी है। इस अवधि में कमी पूरी हो जाती है तो उसके बाद पेनाल्टी लगाने की स्थिति नहीं बनती।
शुल्क कमी के हिसाब से
मिनिमम बैलेंस का शुल्क खाते में हुई कमी के अनुपात में होना चाहिए। यानी बैंक केवल एक मनमानी बड़ी रकम को पेनाल्टी के तौर पर नहीं लगा सकता। RBI ने यह भी कहा है कि ऐसे शुल्क उचित होने चाहिए और बैंक की सेवा उपलब्ध कराने की औसत लागत से बहुत ज्यादा नहीं होने चाहिए।
खाता माइनस नहीं होगा
अगर मिनिमम बैलेंस नहीं रखने का शुल्क काटने के बाद बचत खाते का बैलेंस निगेटिव हो जाता है, तो यह RBI के निर्देशों के खिलाफ है। ऐसे शुल्क की वजह से सेविंग अकाउंट का बैलेंस केवल शुल्क वसूली के कारण शून्य से नीचे नहीं जाना चाहिए।
शुरुआत में जानकारी जरूरी
खाता खोलते समय बैंक को ग्राहक को न्यूनतम बैलेंस की शर्त और उससे जुड़े शुल्कों के बारे में पारदर्शी तरीके से जानकारी देनी होती है। बाद में नियम या शुल्क में बदलाव किया जाता है तो मौजूदा ग्राहकों को भी पहले से जानकारी देना जरूरी है।
SBI का नियम अलग
हर बैंक की मिनिमम बैलेंस नीति एक जैसी नहीं होती। उदाहरण के तौर पर SBI ने सामान्य सेविंग बैंक खातों में औसत न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने की अनिवार्यता और उससे जुड़े शुल्क को 2020 में खत्म कर दिया था। इसलिए किसी भी बैंक में खाता खोलने से पहले उसके मौजूदा शुल्क और खाते की शर्तें जांचना जरूरी है।
शिकायत कैसे करें
अगर आपको लगता है कि बैंक ने नियमों के खिलाफ मिनिमम बैलेंस शुल्क काटा है, तो सबसे पहले बैंक में लिखित शिकायत करें। शिकायत में खाते से काटी गई रकम, तारीख और उपलब्ध SMS या ईमेल की जानकारी दें। बैंक की शिकायत निवारण प्रक्रिया के तहत मामला आगे बढ़ाया जा सकता है।
अगर बैंक की शिकायत का समाधान नहीं होता, तो RBI की शिकायत व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए बैंक में की गई शिकायत और उससे जुड़े दस्तावेज संभालकर रखना जरूरी है।
जीरो बैलेंस विकल्प
जिन ग्राहकों को बार-बार मिनिमम बैलेंस बनाए रखने में परेशानी होती है, वे Basic Savings Bank Deposit Account यानी BSBDA के बारे में बैंक से जानकारी ले सकते हैं। RBI के अनुसार BSBDA में न्यूनतम बैलेंस रखने की जरूरत नहीं होती। इसमें निर्धारित बुनियादी बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
हालांकि BSBDA में कुछ सुविधाओं और निकासी को लेकर निर्धारित शर्तें होती हैं। इसलिए खाता बदलने से पहले बैंक से उसके मौजूदा नियम और सुविधाओं की जानकारी लेना बेहतर है।
