Election Result: बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने राष्ट्रपति चुनाव में शानदार जीत दर्ज की है। उन्हें कुल 255 वोट मिले, जबकि बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन के उम्मीदवार कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद को 88 वोट हासिल हुए। चुनाव के मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव अधिकारी एएमएम नासिर उद्दीन ने संसद में करीब तीन घंटे चली मतदान प्रक्रिया के बाद नतीजों की घोषणा की। मतदान शाम 5 बजे समाप्त हुआ।
मतदान प्रक्रिया
एएमएम नासिर उद्दीन के मुताबिक, राष्ट्रपति चुनाव में सभी 349 सांसदों ने मतदान किया। इसके लिए तीन पारदर्शी मतपेटियों का इस्तेमाल किया गया। जारी किए गए कुल 349 मतपत्रों में से 343 मतपत्रों का इस्तेमाल हुआ, जबकि छह मतपत्र बिना इस्तेमाल के रह गए। चुनाव अधिकारी ने बताया कि इस्तेमाल किए गए सभी 343 मतपत्र वैध पाए गए। राष्ट्रपति चुनाव अधिनियम, 1991 की धारा 10 के तहत चार मतपत्र बदले भी गए। मतदान और मतगणना के दौरान तीन चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग के सचिव मौजूद रहे।
मजबूत राजनीतिक सफर
मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर BNP के वरिष्ठ और लंबे समय से पार्टी का नेतृत्व कर रहे नेताओं में शामिल हैं। वह पार्टी के सबसे लंबे समय तक महासचिव रहने वाले नेताओं में गिने जाते हैं। ठाकुरगांव-1 निर्वाचन क्षेत्र से सांसद आलमगीर ने तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार में स्थानीय सरकार, ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्री के तौर पर भी जिम्मेदारी संभाली है। इससे पहले 2001 से 2006 के बीच वह कृषि मंत्रालय और बाद में नागरिक उड्डयन एवं पर्यटन मंत्रालय में राज्य मंत्री रहे।
छात्र राजनीति से शुरुआत
फखरुल इस्लाम आलमगीर ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत ढाका विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति से की थी। वह तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान छात्र संघ (ईपीएसयू) से जुड़े थे, जिसे अब बांग्लादेश छात्र संघ के नाम से जाना जाता है। वह संगठन की एसएम हॉल इकाई के महासचिव चुने गए। इसके बाद संगठन में आगे बढ़ते हुए 1969 के आंदोलन के दौरान उन्हें ढाका विश्वविद्यालय इकाई का अध्यक्ष चुना गया। वर्ष 1972 में उन्होंने ढाका कॉलेज में अर्थशास्त्र पढ़ाना शुरू किया।
सरकारी सेवा का अनुभव
आलमगीर ने राष्ट्रपति जियाउर रहमान के प्रशासन में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने उप प्रधानमंत्री एसए बारी और राज्य मंत्री अमीरुल इस्लाम कमाल के सचिव के रूप में काम किया। इसके बाद वह ठाकुरगांव सरकारी कॉलेज में अर्थशास्त्र के शिक्षक रहे। उन्होंने बांग्लादेश सरकार के निरीक्षण एवं लेखापरीक्षा निदेशालय में लेखा परीक्षक के तौर पर भी काम किया। इसके अलावा वह यूनेस्को से भी जुड़े रहे और वर्ष 1986 तक विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं।









