National Road Safety: देश में लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं के बीच केंद्र सरकार ने आखिरकार राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड (National Road Safety Board) का गठन कर दिया है। करीब सात वर्षों की देरी और सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बोर्ड के गठन की अधिसूचना जारी की। उत्तर प्रदेश कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी नितिन रमेश गोकर्ण को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। बोर्ड में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों सहित कुल 20 सदस्य शामिल होंगे।
सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद बनी तस्वीर
मोटर वाहन अधिनियम, 1988 में वर्ष 2019 के संशोधन के तहत राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड का गठन कानूनी रूप से अनिवार्य किया गया था। हालांकि, लंबे समय तक यह केवल कागजों तक सीमित रहा। बोर्ड गठन में लगातार हो रही देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई और केंद्र सरकार को निर्धारित समय सीमा के भीतर इसे गठित करने का अंतिम अवसर दिया था। इसके बाद सरकार ने बोर्ड के गठन की प्रक्रिया पूरी की।
क्या होंगे बोर्ड के प्रमुख दायित्व?
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड केंद्र और राज्य सरकारों को सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर सलाह देगा। इसमें सड़क डिजाइन में सुधार, वाहन सुरक्षा मानकों की निगरानी, ट्रैफिक प्रबंधन, पैदल यात्रियों, साइकिल चालकों, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा से जुड़े सुझाव शामिल होंगे। इसके अलावा स्कूलों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों के पास सुरक्षित फुटओवर ब्रिज और अंडरपास की योजना तैयार करने तथा राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी भी बोर्ड निभाएगा।
विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ होंगे शामिल
बोर्ड में उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और दिल्ली के परिवहन आयुक्त, महाराष्ट्र, ओडिशा और त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं। सेव लाइफ फाउंडेशन के संस्थापक पीयूष तिवारी समेत विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ भी बोर्ड का हिस्सा होंगे।
सरकार का मानना है कि इस बोर्ड के सक्रिय होने से सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने, सुरक्षित परिवहन व्यवस्था विकसित करने और राष्ट्रीय स्तर पर सड़क सुरक्षा नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी।









