PM Modi Focus On Natural Farming: प्रधानमंत्री Narendra Modi ने खेती में लगातार बढ़ रहे रासायनिक खादों के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि केमिकल वाली खेती का असर अब मिट्टी की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। खेतों की उपजाऊ क्षमता धीरे-धीरे कम हो रही है, जिससे आने वाले समय में खेती और फसल उत्पादन पर संकट खड़ा हो सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लगातार रासायनिक खादों का इस्तेमाल “धरती माँ को पीड़ा” दे रहा है। उन्होंने किसानों और देशवासियों से अपील की कि रासायनिक उर्वरकों की खपत को 25 प्रतिशत से लेकर 50 प्रतिशत तक कम करने का प्रयास किया जाए। उनका कहना है कि अगर किसान धीरे-धीरे प्राकृतिक खेती और जैविक तरीकों की तरफ बढ़ेंगे, तो इससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होगी और देश की विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी।
प्राकृतिक खेती को बताया भविष्य का रास्ता
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती सिर्फ खेती का तरीका नहीं, बल्कि आने वाले समय की जरूरत है। उन्होंने बताया कि देश के कई राज्यों में किसान अब गोबर, जीवामृत, वर्मी कम्पोस्ट और दूसरे जैविक तरीकों को अपनाकर खेती कर रहे हैं। इससे खेती की लागत कम हो रही है और मिट्टी की ताकत भी बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि ज्यादा रासायनिक खाद इस्तेमाल करने से मिट्टी में मौजूद जरूरी जैविक तत्व खत्म होने लगते हैं। इसका असर धीरे-धीरे फसल की पैदावार पर पड़ता है। ऐसे में प्राकृतिक खेती को खेती को सुरक्षित और टिकाऊ बनाए रखने का अच्छा विकल्प माना जा रहा है।
सोलर पंप से घटेगा खर्च
प्रधानमंत्री मोदी ने खेती में ऊर्जा खर्च कम करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों को डीजल पंप की जगह सोलर पंप अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इससे सिंचाई की लागत कम होगी और डीजल पर निर्भरता भी घटेगी।
उन्होंने कहा कि सोलर पंप का इस्तेमाल पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है। इससे खेती सस्ती, आसान और लंबे समय तक टिकाऊ बन सकती है। सरकार की कई योजनाओं के जरिए किसानों को सोलर पंप लगाने में मदद दी जा रही है।
लोकल उत्पादों को बढ़ावा देने की बात
प्रधानमंत्री ने “वोकल फॉर लोकल” और “मेड इन इंडिया” उत्पादों को बढ़ावा देने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पाद खरीदने से देश में उत्पादन बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे विदेशी चीजों पर निर्भरता भी कम होगी।
कृषि क्षेत्र में इसका फायदा और ज्यादा देखने को मिल सकता है। देसी बीज, जैविक खाद और स्थानीय कृषि उपकरणों को बढ़ावा देकर गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जा सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक संकटों के बीच भारत को आत्मनिर्भर और टिकाऊ खेती की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा। उन्होंने किसानों से ऐसी खेती अपनाने की अपील की, जो पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित हो।



