सहारनपुर में एक पुजारी पर दर्ज मामले को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। भीम आर्मी के विरोध में ब्राह्मण और सवर्ण समाज के हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने SSP दफ्तर का घेराव किया और वहां सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया। प्रदर्शन में शामिल लोग भगवा दुपट्टा और माथे पर तिलक लगाकर पहुंचे थे। पूरे इलाके में ‘जय श्रीराम’ के नारे गूंजते रहे। बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से शहर में कई जगह लंबा जाम लग गया। हालात को देखते हुए पुलिस और PAC की भारी तैनाती की गई। सुरक्षा के बीच पूरा इलाका छावनी जैसा नजर आया।
पुजारी को फंसाने का आरोप
प्रदर्शन के दौरान मंच से कई लोगों ने भीम आर्मी पर गंभीर आरोप लगाए। एक पंडित ने कहा कि 45 वर्षीय पुजारी विजय शास्त्री को जानबूझकर झूठे मामले में फंसाया गया है। उनका कहना था कि कुछ लोग मंदिर की कीमती जमीन और संपत्ति पर कब्जा करना चाहते हैं। इसी वजह से पुजारी को डराकर मंदिर से हटाने की कोशिश की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जिस बच्ची का नाम इस मामले में लिया जा रहा है, वह अक्सर मंदिर में खेलने आती थी। पुजारी बच्चों को प्रसाद दिया करते थे और उनके साथ सामान्य व्यवहार करते थे।
मंदिरों के कपाट भी रहे बंद
इस मामले के विरोध में सहारनपुर के कई मंदिरों के कपाट बंद रखे गए। ब्राह्मण समाज और अन्य सवर्ण संगठनों ने इसे समाज के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया। लोगों का कहना था कि अगर मंदिर में पूजा-पाठ करने वाले पुजारियों को भी ऐसे मामलों में फंसाया जाएगा, तो भविष्य में कोई भी व्यक्ति मंदिर सेवा करने से डरेगा। प्रदर्शन के दौरान कुछ भीम आर्मी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी की खबर मिलते ही माहौल और ज्यादा गरमा गया। हालांकि पुलिस ने स्थिति को संभाले रखा और किसी बड़े टकराव की नौबत नहीं आने दी।
वसूली के आरोप भी लगाए
प्रदर्शनकारियों ने भीम आर्मी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि संगठन के कुछ लोग हर जगह जाकर झूठे मुकदमे दर्ज कराने का काम करते हैं। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि बाद में समझौते और फैसले के नाम पर लोगों से पैसे वसूले जाते हैं। उनका कहना था कि इस तरह के मामलों से पूरे देश में सवर्ण समाज को परेशान किया जा रहा है।
प्रशासन को दिया अल्टीमेटम
प्रदर्शन के बाद लोगों ने पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। पंडितों और समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि प्रशासन ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है। हालांकि उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर किसी दबाव में आकर गलत कार्रवाई की गई, तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा और समाज फिर सड़कों पर उतरेगा।


