EU Smartphone Battery Rule: आने वाले कुछ सालों में स्मार्टफोन की दुनिया में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। यूरोपियन यूनियन (EU) ने फैसला किया है कि 2027 से वहां बिकने वाले सभी स्मार्टफोन में हटाने वाली बैटरी देना जरूरी होगा। इसका मतलब यह है कि यूजर खुद अपने फोन की बैटरी निकालकर आसानी से बदल सकेंगे। अभी ज्यादातर स्मार्टफोन में बैटरी फिक्स होती है, जिसे बदलना मुश्किल और महंगा होता है।
यूजर्स को मिलेगा फायदा
इस नए नियम का सबसे बड़ा फायदा आम लोगों को होगा। अक्सर ऐसा होता है कि फोन ठीक चलता रहता है, लेकिन बैटरी खराब होने लगती है। बैटरी जल्दी खत्म होती है और बार-बार चार्ज करना पड़ता है। ऐसे में लोग मजबूरी में नया फोन खरीद लेते हैं। अब इस नियम के बाद सिर्फ बैटरी बदलकर फोन को लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकेगा।
कंपनियों पर लागू होगा नियम
यह नियम सिर्फ किसी एक कंपनी के लिए नहीं है, बल्कि सभी स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों पर लागू होगा। इसमें Apple, Google और Samsung जैसी बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं। कंपनियों को फरवरी 2027 तक अपने डिवाइस इस तरह डिजाइन करने होंगे कि बैटरी आसानी से निकाली और लगाई जा सके।
क्यों जरूरी पड़ा यह फैसला
EU ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि आज के समय में इलेक्ट्रॉनिक कचरा तेजी से बढ़ रहा है। छोटे-छोटे कारणों, जैसे बैटरी खराब होने पर, लोग पूरा फोन फेंक देते हैं। इससे पर्यावरण को नुकसान होता है। इस नियम का मकसद ई-कचरे को कम करना और प्रोडक्ट्स को ज्यादा समय तक उपयोग में रखना है।
फोन की डिजाइन में बदलाव संभव
इस बदलाव के बाद स्मार्टफोन की डिजाइन में थोड़ा फर्क देखने को मिल सकता है। फोन पहले से थोड़ा मोटा हो सकता है, ताकि बैटरी को आसानी से निकाला जा सके। हालांकि, यह बदलाव यूजर्स के लिए फायदेमंद ही साबित होगा क्योंकि इससे रिपेयर आसान हो जाएगा।
Google ने शुरू की तैयारी
कुछ कंपनियों ने अभी से इसकी तैयारी शुरू कर दी है। Google ने हाल ही में एक पेटेंट फाइल किया है, जिसमें ऐसी बैटरी का जिक्र है जिसे आसानी से बदला जा सके। इस नई तकनीक में बैटरी को खास तरीके से फिट किया जाएगा, जिससे वह सुरक्षित भी रहे और जरूरत पड़ने पर आसानी से निकाली भी जा सके।
लैपटॉप में भी आएगा बदलाव
सिर्फ स्मार्टफोन ही नहीं, लैपटॉप के लिए भी नए नियम बनाए जा रहे हैं। 28 अप्रैल 2026 से EU में लॉन्च होने वाले सभी नए लैपटॉप में USB-C चार्जिंग पोर्ट होना जरूरी होगा। यह नियम पहले ही मोबाइल और अन्य डिवाइस में लागू किया जा चुका है।
दूसरे देशों पर भी असर संभव
जैसे पहले USB-C चार्जिंग का नियम धीरे-धीरे दुनिया भर में लागू हुआ, वैसे ही यह बैटरी वाला नियम भी अन्य देशों में आ सकता है। भारत में भी आने वाले समय में ऐसे बदलाव देखने को मिल सकते हैं।



