Supreme Court Relief: निचली अदालतों में सिविल जज बनने की तैयारी कर रहे कानून छात्रों और युवा वकीलों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अहम राहत दी है। 21 अगस्त 2026 को अदालत ने मई 2025 के अपने फैसले की समीक्षा करते हुए एंट्री-लेवल न्यायिक सेवा यानी Civil Judge (Junior Division) की सीधी भर्ती के लिए जरूरी वकालत अनुभव में बड़ा बदलाव किया। अब तीन साल की प्रैक्टिस की अनिवार्यता घटाकर एक साल कर दी गई है। हालांकि अदालत ने इसके साथ कुछ विशेष संक्रमणकालीन प्रावधान भी बनाए हैं।
मई 2025 में बदला था नियम
मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों में सीधे सिविल जज बनने की भर्ती को लेकर बड़ा फैसला दिया था। इसके तहत न्यायिक सेवा परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के लिए कम से कम तीन साल की वकालत का अनुभव जरूरी कर दिया गया था। इस नियम का सीधा असर उन लॉ ग्रेजुएट्स पर पड़ा, जो कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद सीधे न्यायिक सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। उन्हें परीक्षा देने से पहले लंबे समय तक वकालत करनी पड़ती।
अब एक साल जरूरी
नए फैसले का सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यही है कि भविष्य में एंट्री-लेवल न्यायिक सेवा परीक्षा के लिए तीन साल की जगह एक साल की सक्रिय वकालत जरूरी होगी। इसका मतलब है कि लॉ की पढ़ाई पूरी करने के बाद उम्मीदवार तीन साल तक इंतजार करने के बजाय एक साल की निर्धारित प्रैक्टिस पूरी करने के बाद परीक्षा के लिए पात्र हो सकेगा। हालांकि अंतिम पात्रता संबंधित राज्य की न्यायिक सेवा भर्ती अधिसूचना में दी गई शर्तों के अनुसार ही तय होगी।
संक्रमणकालीन राहत
सुप्रीम कोर्ट ने मई 2025 के फैसले से प्रभावित उम्मीदवारों के लिए खास ट्रांजिशन व्यवस्था भी बनाई है। 20 मई 2025 से 31 मार्च 2027 के बीच जारी होने वाले संबंधित न्यायिक सेवा भर्ती नोटिफिकेशन में उम्मीदवारों को तीन साल की प्रैक्टिस की शर्त के कारण बाहर नहीं किया जाएगा। इस अवधि के लिए अदालत ने विशेष व्यवस्था तय की है, जिससे प्रभावित युवा उम्मीदवारों को न्यायिक सेवा परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिल सके।
चयन के बाद ट्रेनिंग
अदालत ने परीक्षा में प्रवेश की शर्त को आसान जरूर किया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि चयनित उम्मीदवार बिना व्यावहारिक अनुभव के सीधे नियमित जज बन जाएंगे। चयन के बाद उम्मीदवारों के लिए एक साल की ट्रेनिंग और उसके बाद संरचित लॉ क्लर्कशिप की व्यवस्था रहेगी। इसका उद्देश्य उन्हें अदालत की वास्तविक कार्यवाही, मुकदमों, दस्तावेजों और न्यायिक प्रक्रिया की व्यावहारिक समझ देना है।
1 अप्रैल 2027 से नियम
1 अप्रैल 2027 या उसके बाद जारी होने वाले न्यायिक सेवा परीक्षा के नोटिफिकेशन के लिए नया नियम पूरी तरह लागू होगा। ऐसे उम्मीदवारों को परीक्षा में बैठने से पहले कम से कम एक साल की वास्तविक सक्रिय वकालत पूरी करनी होगी। यानी नई व्यवस्था में तीन साल के बजाय एक साल की प्रैक्टिस परीक्षा की पात्रता के लिए पर्याप्त होगी, जबकि चयन के बाद प्रशिक्षण और क्लर्कशिप की प्रक्रिया जारी रहेगी।
फैसले का असर
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने बहुमत से समीक्षा याचिकाओं का निपटारा किया। जस्टिस के. विनोद चंद्रन ने अलग राय दी। अदालत ने मई 2025 के फैसले की मूल सोच को पूरी तरह खत्म नहीं किया। न्यायिक सेवा में आने वाले उम्मीदवारों के लिए व्यावहारिक कानूनी अनुभव की जरूरत को बरकरार रखते हुए उसकी अवधि को तीन साल से घटाकर एक साल किया गया है।
युवाओं के लिए क्या बदला?
इस फैसले से न्यायिक सेवा की तैयारी कर रहे लॉ ग्रेजुएट्स के लिए करियर प्लानिंग आसान हो सकती है। पहले तीन साल की अनिवार्य प्रैक्टिस के कारण उन्हें परीक्षा से पहले लंबा इंतजार करना पड़ता था। अब एक साल की सक्रिय वकालत के बाद परीक्षा में शामिल होने का रास्ता खुलेगा। हालांकि उम्मीदवारों को यह ध्यान रखना होगा कि न्यायिक सेवा परीक्षा की कठिनाई कम नहीं हुई है। लिखित परीक्षा, कानून की समझ, भाषा, सामान्य ज्ञान और इंटरव्यू की तैयारी पहले की तरह महत्वपूर्ण रहेगी।
नोटिफिकेशन देखना जरूरी
उम्मीदवारों को अपने राज्य की न्यायिक सेवा भर्ती अधिसूचना को ध्यान से पढ़ना चाहिए। भर्ती प्रक्रिया, रिक्तियां, परीक्षा पैटर्न और अन्य पात्रता शर्तें राज्य के अनुसार अलग हो सकती हैं। खासतौर पर 31 मार्च 2027 और 1 अप्रैल 2027 की तारीखें महत्वपूर्ण हैं। इसलिए केवल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर पात्रता तय करने के बजाय आवेदन करते समय संबंधित राज्य की आधिकारिक अधिसूचना को अंतिम आधार मानना जरूरी होगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। पात्रता और भर्ती नियमों के लिए संबंधित राज्य की आधिकारिक न्यायिक सेवा अधिसूचना को अंतिम आधार मानें।









