Supreme Court of India ने चुनाव से पहले बांटी जा रही मुफ्त सुविधाओं यानी फ्रीबीज पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने राज्य सरकारों से सवाल किया कि अगर मुफ्त बिजली, खाना और अन्य सुविधाएं इसी तरह दी जाती रहीं, तो विकास और बुनियादी ढांचे के लिए पैसा कहां से आएगा। इस साल कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।
याचिका से बढ़ी बहस
Tamil Nadu Power Distribution Corporation Limited ने एक याचिका दायर कर सभी उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली देने का प्रस्ताव रखा है, चाहे उनकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो। इस प्रस्ताव के बाद मुफ्त योजनाओं को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि कई राज्य पहले से घाटे में हैं, फिर भी करोड़ों रुपये मुफ्त योजनाओं पर खर्च कर रहे हैं।
घाटे के बावजूद खर्च बढ़ रहा
सुनवाई में अदालत ने साफ कहा कि जब सरकारें बजट घाटे की बात करती हैं और विकास के लिए पैसों की कमी बताती हैं, तब हर किसी को मुफ्त सुविधाएं देना समझ से परे है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि बिना जरूरत के सबको मुफ्त सुविधाएं देना ऐसी सोच पैदा करता है, जिससे काम करने की प्रेरणा कम हो सकती है। इससे आर्थिक अनुशासन भी कमजोर होता है।
जरूरतमंदों की मदद सही, पर सीमा जरूरी
अदालत ने कहा कि गरीब और जरूरतमंद लोगों को सहायता देना पूरी तरह सही है। लेकिन जो लोग भुगतान करने में सक्षम हैं, उन्हें भी मुफ्त सुविधाएं देना गलत संदेश देता है।
कोर्ट ने पूछा कि बिना
आर्थिक स्थिति देखे सभी को लाभ देना क्या सही नीति है? क्या इससे तुष्टीकरण की राजनीति को बढ़ावा नहीं मिलेगा?
रोजगार पर देना होगा जोर
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को सलाह दी कि मुफ्त सुविधाएं बांटने के बजाय रोजगार के अवसर बढ़ाने पर ध्यान दें। अगर सरकारें लोगों को काम और आय के मौके देंगी, तो अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
अदालत ने कहा कि सुबह से शाम तक मुफ्त खाना, साइकिल और बिजली देने से काम करने की संस्कृति पर असर पड़ सकता है। इससे विकास परियोजनाओं के लिए पैसा भी कम पड़ सकता है।
विकास बनाम फ्रीबीज की बहस
कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्यों को संतुलन बनाना होगा। एक तरफ कल्याणकारी योजनाएं जरूरी हैं, तो दूसरी तरफ विकास और बुनियादी ढांचे पर खर्च भी उतना ही जरूरी है। यह मामला अब सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे देश में चुनावी राजनीति और आर्थिक नीतियों पर बड़ी बहस का कारण बन गया है।
