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कौन है जस्टिस सूर्यकांत, जो बने भारत के 53वें CJI , धारा 370 और वन रैंक-वन पेंशन समेत सुना चुके हैं ये 11 अहम फैसले

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हरियाणा के एक छोटे से शहर हिसार में जन्में जस्टिस सूर्यकांत को भारत के प्रधान न्यायधीश की शपथ दिलाई। राष्ट्रपति भवन में उनका भव्य शपथ ग्रहण समारोह देखने को मिला। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर तमाम केंद्रीय मंत्री भी मौजूद रहे।

by Vinod
नवम्बर 24, 2025
in Breaking, राष्ट्रीय

नई दिल्ली ऑनलाइन डेस्क। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हरियाणा के एक छोटे से शहर हिसार में जन्में जस्टिस सूर्यकांत को भारत के प्रधान न्यायधीश की शपथ दिलाई। राष्ट्रपति भवन में उनका भव्य शपथ ग्रहण समारोह देखने को मिला। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर तमाम केंद्रीय मंत्री भी मौजूद रहे। जस्टिस सूर्यकांत देश के 53वें सीजेआई बने हैं। बतौर न्यायधीश उन्होंने धारा 370, वन रैंक-वन पेंशन से लेकर कई ऐतिहासिक फैसलों पर अपनी मुहर लगाई। अब जस्टिस सूर्यकांत 24 नवंबर, 2025 से 9 फरवरी, 2027 तक लगभग 15 महीने देश की सर्वोच्च अदालत का नेतृत्व करेंगे।

कौन हैं सीजेआई सूर्यकांत

न्यायमूर्ति सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी, 1962 को हरियाणा के हिसार जिले के छोटे-से गांव पेटवाड़ (नारनौंद) में मदनगोपाल शास्त्री और शशि देवी के घर हुआ। पिता संस्कृत के शिक्षक थे, जबकि माता एक साधारण गृहिणी। वे पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। उनके तीन भाई ऋषिकांत (सेवानिवृत्त शिक्षक), शिवकांत (डॉक्टर) और देवकांत (सेवानिवृत्त आईटीआई प्रशिक्षक) और एक बहन कमला देवी हैं। पिता चाहते थे कि बेटा उच्च कानूनी शिक्षा (एलएलएम) प्राप्त करे, मगर जस्टिस सूर्यकांत ने उन्हें मनाया कि वह एलएलबी के बाद सीधे वकालत शुरू करेंगे। बेटे की बात पिता ने मान ली और जस्टिस सूर्यकांत ने एलएलबी की पढ़ाई शुरू की।

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1984 में हासिल की कानून की डिग्री

जस्टिस सूर्यकांत ने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से 1984 में कानून की डिग्री हासिल की। उसी वर्ष उन्होंने हिसार जिला न्यायालय में अपने कानूनी सफर की शुरुआत भी की। एक साल यहां वकालत करने के बाद 1985 में, न्यायमूर्ति कांत पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में अपनी वकालत शुरू करने के लिए चंडीगढ़ चले गए। इसी हाईकोर्ट में न्यायाधीश रहते हुए उन्होंने 2011 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय से कानून में स्नातकोत्तर की डिग्री भी हासिल की। जस्टिस कांत महज 38 वर्ष की आयु में सात जुलाई, 2000 को हरियाणा के सबसे कम उम्र के महाधिवक्ता बने।

पर्यावरण से उन्हें बेहद प्रेम

जस्टिस सूर्यकांत ने शानदार वकालत की और वह वरिष्ठ अधिवक्ता भी नियुक्त हुए और 2004 में उन्हें पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया। 14 वर्षों से अधिक समय तक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में सेवा देने के बाद, वह अक्तूबर, 2018 में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और फिर 24 मई, 2019 को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने। न्यायमूर्ति सूर्यकांत एक बेहतरीन कवि भी हैं। जब वह कॉलेज में थे, तब उनकी एक कविता, ’मेंढ पर मिट्टी चढ़ा दो’ काफी लोकप्रिय हुई थी। पर्यावरण से उन्हें बेहद प्रेम है। गांव में एक तालाब के जीर्णोद्धार के लिए उन्होंने अपनी जेब से दान दिया।

जस्टिस सूर्यकांत पत्रकारिता के पेशे के बेहद मुरीद

जस्टिस सूर्यकांत पत्रकारिता के पेशे के बेहद मुरीद हैं। वह पत्रकार की तरह ही किसी मामले की तह में जाना पसंद करते हैं। वह खुद को दिल से पत्रकार कहते हैं। इसके अलावा, उन्होंने एडमिनिस्ट्रेटिव जियोग्राफी ऑफ इंडिया शीर्षक से एक किताब भी लिखी है, जो साल 1988 में प्रकाशित हुई। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में रहने के दौरान जस्टिस सूर्यकांत पर गंभीर कदाचार के आरोप लगे थे। 2012 में, एक रियल एस्टेट एजेंट ने उन पर करोड़ों रुपये के लेन-देन में शामिल होने का आरोप लगाया था। 2017 में, पंजाब के एक कैदी ने शिकायत दर्ज कराई और कहा कि जस्टिस कांत ने जमानत देने के लिए रिश्वत ली थी। हालांकि, ये आरोप साबित नहीं हो सके।

जस्टिस सूर्यकांत के अहम फैसले

5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर को खास राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को रद कर दिया था। सरकार के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई और जिस बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की, जस्टिस सूर्यकांत भी उसी बेंच का हिस्सा थे। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए राज्य में जल्द से जल्द चुनाव करवाने का आदेश दिया था। जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने गुलामी के काल में बने राजद्रोह कानून (ैमकपजपवद स्ूं) के तहत कोई भी नया मामला दर्ज न करने का आदेश दिया था। राज्य के विधेयकों के संबध में राज्यपाल और राष्ट्रपति की शक्तियों पर टिप्पणी करने वाली बेंच में भी जस्टिस सूर्यकांत शामिल थे।

इन फैसलों में भी रहे शामिल

बिहार एसआईआर पर सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने चुनाव आयोग को आदेश दिया था कि मतदाता सूची से निकाले गए 65 लाख मतदाताओं के नाम सार्वजनिक किए जाएं। जस्टिस सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन सहित सभी बार एसोसिएशन में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने के निर्देश दिए थे। 2022 में पंजाब दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक देखने को मिली थी। जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने मामले की जांच के लिए जस्टिस इंदु मल्होत्रा के नेतृत्व में कमेटी गठित की थी। जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने वन रैंक वन पेंशन योजना को बरकरार रखने का फैसला सुनाया था।

महिला सरपंच के पद को किया था बहाल

1967 के अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी मामले पर सुनवाई के लिए बनी 7 जजों की पीठ में भी जस्टिस सूर्यकांत शामिल थे। इस पीठ ने 1967 के फैसले को खारिज कर दिया था, जिससे एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे पर पुनर्विचार करने के रास्ते खुल गए थे। पेगासस स्पाइवेयर मामले पर करते हुए जस्टिस सूर्यकांत ने इसे गैरकानूनी करार दिया था और मामले की जांच के लिए साइबर एक्सपर्ट्स का पैनल नियुक्त किया था। जस्टिस सूर्यकांत गैरकानूनी रूप से हटाई गई महिला सरपंच को पद पर बहाल करने वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच का भी हिस्सा रहे हैं। जस्टिस कांत दिल्ली आबकारी शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल को जमानत देने वाली पीठ के सदस्य थे। हालांकि, उन्होंने केजरीवाल की गिरफ्तारी को जायज ठहराया था।

 

 

Tags: Justice Surya Kant appointed CJIPM Narendra ModiSupreme CourtWho is Justice Surya Kant

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