सोमवार, सितम्बर 21, 2026
  • Login
News1India
  • राष्ट्रीय
  • देश
  • विदेश
  • राज्य ▼
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्ली
    • बिहार
    • हरियाणा
    • राजस्थान
    • छत्तीसगढ़
    • गुजरात
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
  • क्राइम
  • बिजनेस
  • टेक्नोलॉजी
  • धर्म
  • मौसम
  • ऑटो
  • खेल
🔍

Supreme Court: आरक्षण में आय आधारित सब-कोटा की मांग का केंद्र ने क्यों किया विरोध, जानिए सरकार की राय

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में आरक्षण के भीतर आय आधारित सब-कोटा लागू करने की मांग वाली याचिका का विरोध किया है। सरकार ने कहा कि आरक्षण सामाजिक और ऐतिहासिक पिछड़ेपन पर आधारित है।

by SYED BUSHRA
अगस्त 6, 2026
in राष्ट्रीय
West Bengal SIR Supreme Court
Share on FacebookShare on Twitter

Reservation Policy: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल उस याचिका का विरोध किया है, जिसमें SC, ST, OBC और EWS आरक्षण के भीतर आय के आधार पर सब-कोटा बनाने की मांग की गई थी। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने अदालत में हलफनामा दाखिल कर सरकार का पक्ष रखा है। केंद्र का कहना है कि मौजूदा आरक्षण व्यवस्था केवल आर्थिक स्थिति पर आधारित नहीं है, बल्कि इसके पीछे सामाजिक, शैक्षणिक और ऐतिहासिक पिछड़ापन प्रमुख आधार है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि आरक्षण नीति में किसी बड़े बदलाव का फैसला संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है। केंद्र के मुताबिक, अदालत सरकार को किसी विशेष आरक्षण नीति को लागू करने के लिए बाध्य नहीं कर सकती।

RELATED NEWS

GBU Student को नोटिस जारी करना पड़ा भारी, मजिस्ट्रेट सस्पेंड,सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में दी जानकारी

GBU Student को नोटिस जारी करना पड़ा भारी, मजिस्ट्रेट सस्पेंड,सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में दी जानकारी

सितम्बर 10, 2026
Defamation Case: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- राहुल गांधी कोई VVIP नहीं, जल्द सुनवाई चाहिए तो प्रक्रिया अपनाएं

Defamation Case: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- राहुल गांधी कोई VVIP नहीं, जल्द सुनवाई चाहिए तो प्रक्रिया अपनाएं

सितम्बर 10, 2026

याचिका में मांग

यह याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से दाखिल की गई है। इसमें सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार को अधिक निष्पक्ष आरक्षण व्यवस्था तैयार करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

याचिका में प्रस्ताव रखा गया कि SC, ST, OBC और EWS जैसी आरक्षित श्रेणियों के भीतर आय के आधार पर अलग-अलग सब-कोटा बनाया जाए। इसका उद्देश्य यह बताया गया कि आरक्षण का लाभ संबंधित वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों तक ज्यादा प्रभावी ढंग से पहुंच सके।

याचिका के मुताबिक, इससे आरक्षित वर्गों के भीतर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को प्राथमिकता मिल सकती है और आरक्षण का लाभ अपेक्षाकृत जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाया जा सकता है।

संविधान का हवाला

केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि SC, ST और OBC के लिए आरक्षण का आधार केवल आर्थिक स्थिति नहीं है। इन वर्गों को ऐतिहासिक भेदभाव, सामाजिक पिछड़ेपन और शैक्षणिक पिछड़ेपन जैसी परिस्थितियों के आधार पर आरक्षण दिया गया है।

सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 341, 342 और 342A का भी उल्लेख किया। केंद्र के अनुसार, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों की संवैधानिक पहचान और सूचियों में बदलाव की प्रक्रिया निर्धारित है। इन सूचियों में बदलाव का अधिकार संसद के पास है। इसलिए अदालत के जरिए आय आधारित नया सब-कोटा लागू करने का निर्देश देना मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

क्रीमी लेयर पर तर्क

हलफनामे में केंद्र सरकार ने SC और ST पर OBC की तरह क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू करने का भी विरोध किया है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि क्रीमी लेयर की अवधारणा को SC/ST पर उसी तरह लागू नहीं किया जा सकता, जैसे OBC में किया जाता है।

केंद्र ने इंदिरा साहनी, ईवी चिन्नैया, एम. नागराज और अशोक कुमार ठाकुर जैसे मामलों में दिए गए फैसलों का उल्लेख किया। सरकार का कहना है कि इन फैसलों को देखते हुए SC/ST की सूची और उससे जुड़े संवैधानिक प्रावधानों में बदलाव संसद के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा विषय है।

अलग योजनाओं में आय सीमा

केंद्र ने यह भी बताया कि शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण के अलावा SC, ST और OBC के लिए चलने वाली कई कल्याणकारी योजनाओं में पहले से ही आय सीमा निर्धारित है। इसका उद्देश्य सरकारी सहायता को ज्यादा जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाना है।

हालांकि, आरक्षण के भीतर आय आधारित सब-कोटा लागू करने पर सरकार ने कहा कि इसके लिए व्यापक सामाजिक और आर्थिक आंकड़ों का अध्ययन जरूरी होगा। केवल आय को आधार बनाकर आरक्षण की मौजूदा संरचना में बदलाव करना उचित नहीं होगा।

याचिका खारिज करने की मांग

केंद्र सरकार ने याचिका को भ्रामक और आधारहीन बताते हुए इसे खारिज करने की मांग की है। सरकार का तर्क है कि याचिका में संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत ऐसा कोई मौलिक अधिकार नहीं बताया गया है, जिसे लागू कराने के लिए अदालत से इस तरह की नीति बनाने का निर्देश मांगा जा सके।

यानी केंद्र का स्पष्ट रुख है कि आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव का फैसला न्यायपालिका के बजाय संसद और संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई और टिप्पणियों पर नजर रहेगी।

Tags: Reservation Policysocial justiceSupreme Court
Share196Tweet123Share49

SYED BUSHRA

Related Posts

GBU Student को नोटिस जारी करना पड़ा भारी, मजिस्ट्रेट सस्पेंड,सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में दी जानकारी

GBU Student को नोटिस जारी करना पड़ा भारी, मजिस्ट्रेट सस्पेंड,सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में दी जानकारी

by Kirtika Tyagi
सितम्बर 10, 2026

ग्रेटर नोएडा की गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के छात्र अक्षत त्रिपाठी को जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन में शामिल होने के...

Defamation Case: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- राहुल गांधी कोई VVIP नहीं, जल्द सुनवाई चाहिए तो प्रक्रिया अपनाएं

Defamation Case: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- राहुल गांधी कोई VVIP नहीं, जल्द सुनवाई चाहिए तो प्रक्रिया अपनाएं

by SYED BUSHRA
सितम्बर 10, 2026

Rahul Gandhi Defamation Case Supreme Court: राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मानहानि मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट...

Supreme Court CJP Protest Case

CJP Protest: छात्रों को नोटिस पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट से मांगा जवाब

by SYED BUSHRA
सितम्बर 9, 2026

 Supreme Court CJP Protest Case:CJP के विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा एक छात्र...

Rajpal Yadav Supreme Court: चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे राजपाल यादव, जानिए क्या करने का निर्देश

Rajpal Yadav Supreme Court: चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे राजपाल यादव, जानिए क्या करने का निर्देश

by Sadaf Farooqui
सितम्बर 8, 2026

Rajpal Yadav Supreme Court:  सुप्रीम कोर्ट में प्रारंभिक सुनवाई के दौरान अदालत ने निर्देश दिया कि राजपाल यादव को निर्धारित...

Airfare Hearing: दिवाली-छठ पर आसमान छूते टिकट के दाम, सुप्रीम कोर्ट में एयरफेयर पर सुनवाई

Airfare Hearing: दिवाली-छठ पर आसमान छूते टिकट के दाम, सुप्रीम कोर्ट में एयरफेयर पर सुनवाई

by Kirtika Tyagi
सितम्बर 6, 2026

अगर आपने कभी दिवाली, छठ या किसी जरूरी काम से अचानक फ्लाइट टिकट बुक की है, तो किराया देखकर झटका...

Next Post
Bofors Case Supreme Court

Supreme Court: बोफोर्स केस की आखिरी अपील भी खारिज, करीब 40 साल पुराने चर्चित विवाद का हुआ अंत

Sanskar TV Awards: संस्कार टीवी की सनातन यात्रा ने रचा नया कीर्तिमान, BCS रत्न अवॉर्ड्स में मिले दो प्रतिष्ठित सम्मान

Sanskar TV Awards: संस्कार टीवी की सनातन यात्रा ने रचा नया कीर्तिमान, BCS रत्न अवॉर्ड्स में मिले दो प्रतिष्ठित सम्मान

News1India

Copyright © 2025 New1India

Navigate Site

  • About us
  • Privacy Policy
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • राष्ट्रीय
  • देश
  • विदेश
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्ली
    • बिहार
    • हरियाणा
    • राजस्थान
    • छत्तीसगढ़
    • गुजरात
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
  • क्राइम
  • बिजनेस
  • टेक्नोलॉजी
  • धर्म
  • मौसम
  • ऑटो
  • खेल

Copyright © 2025 New1India

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In