UN New World Map India:संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 4 सितंबर 2026 को दुनिया के नक्शे में देशों और महाद्वीपों का वास्तविक आकार दिखाने वाले प्रस्ताव को भारी बहुमत से मंजूरी दी। भारत समेत 164 देशों ने इसके पक्ष में वोट किया, जबकि अमेरिका ने विरोध किया और छह देश मतदान से दूर रहे। प्रस्ताव का उद्देश्य पुराने Mercator Projection की जगह ऐसे नक्शे को बढ़ावा देना है, जिसमें देशों का क्षेत्रफल अपेक्षाकृत सही अनुपात में दिखाई दे।
पुराने नक्शे में गड़बड़ी
जिस नक्शे को हम स्कूल की किताबों और दूसरी जगहों पर देखते आए हैं, उसमें ध्रुवों के पास के इलाके वास्तविक आकार से काफी बड़े दिखाई देते हैं। इसका सबसे चर्चित उदाहरण ग्रीनलैंड है, जो नक्शे पर अफ्रीका के लगभग बराबर नजर आता है, जबकि असल में अफ्रीका उससे करीब 14 गुना बड़ा है। Equal Earth जैसे प्रोजेक्शन का मकसद इसी आकार के अंतर को ज्यादा सही तरीके से दिखाना है।
भारत ने आपत्ति क्यों की
यहां सबसे अहम बात यह है कि भारत का वोट किसी खास राजनीतिक नक्शे या भारत की सीमाओं के गलत चित्रण को मंजूरी नहीं देता। भारत ने प्रस्ताव का समर्थन दुनिया के भौगोलिक आकार को ज्यादा सही तरीके से दिखाने के सिद्धांत के लिए किया है। लेकिन बाद में सामने आए नक्शे में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के चित्रण को लेकर भारत ने कड़ा रुख अपनाया। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि भारत का संप्रभु क्षेत्र उसके आधिकारिक नक्शे के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए और गलत या भ्रामक चित्रण स्वीकार नहीं होगा।
नक्शा बदला, सीमा नहीं
इस विवाद को समझने के लिए एक बात बेहद जरूरी है। संयुक्त राष्ट्र का यह प्रस्ताव किसी देश की अंतरराष्ट्रीय सीमा बदलने वाला कानूनी फैसला नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया के देशों और महाद्वीपों के वास्तविक क्षेत्रफल को बेहतर अनुपात में दिखाना है। इसलिए नए प्रोजेक्शन से भारत की जमीन कम या ज्यादा नहीं हो जाती और न ही जम्मू-कश्मीर को लेकर किसी देश का कानूनी दावा अपने आप बदल जाता है।
पाकिस्तान क्यों कूदा
भारत की आपत्ति सामने आने के बाद पाकिस्तान ने भी प्रतिक्रिया दी। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भारत के जम्मू-कश्मीर संबंधी दावों को खारिज करते हुए कहा कि इस क्षेत्र की विवादित स्थिति भारत के किसी एकतरफा दावे या नक्शे से नहीं बदलती। यानी दोनों देशों के बीच असली टकराव नए नक्शे के आकार से ज्यादा जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक और क्षेत्रीय चित्रण को लेकर है।
आगे क्या बदलेगा
इस प्रस्ताव का मतलब यह नहीं है कि दुनिया के सभी नक्शे तुरंत बदल जाएंगे। संयुक्त राष्ट्र महासभा का प्रस्ताव देशों को किसी एक नक्शे को अनिवार्य रूप से अपनाने के लिए बाध्य नहीं करता। अलग-अलग जरूरतों के लिए अलग प्रोजेक्शन इस्तेमाल होते रहेंगे। भारत भी Equal Earth जैसे नक्शे के क्षेत्रफल-संबंधी उद्देश्य का समर्थन कर सकता है, लेकिन अपनी संप्रभु सीमाओं के गलत चित्रण पर समझौता नहीं करेगा।









