ग्रेटर नोएडा में हाल ही में हुए श्रमिक हंगामे और हिंसक प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को कलक्ट्रेट में एक अहम बैठक हुई, जिसमें अधिकारियों ने साफ कर दिया कि अब नियमों का पालन हर हाल में करना होगा।
वेतन सीधे खाते में देने का आदेश
बैठक में हाई लेवल कमेटी ने सभी आउटसोर्सिंग और संविदा एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे श्रमिकों का वेतन सीधे उनके बैंक खाते में जमा करें। साथ ही, हर कर्मचारी को पे स्लिप देना भी अनिवार्य किया गया है। इससे पारदर्शिता बनी रहेगी और विवाद कम होंगे।
डीएम की सख्त चेतावनी
जिला अधिकारी मेधा रूपम ने साफ कहा कि अगर किसी एजेंसी के श्रमिक उपद्रव करते हैं या हिंसा फैलाते हैं, तो उस एजेंसी को सीधे ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं, उसका लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है।
एजेंसियों की भूमिका पर सवाल
डीएम ने बैठक में यह भी कहा कि कई बार विवाद के दौरान एजेंसियों के प्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुंचे। इस पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि एजेंसियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। श्रम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में करीब 600 एजेंसियां ही पंजीकृत हैं। लेकिन असल में 1500 से ज्यादा एजेंसियां काम कर रही हैं। इनमें से कई बिना रजिस्ट्रेशन के चल रही हैं, जो नियमों का उल्लंघन है।
सरकारी नियमों का पालन जरूरी
प्रशासन ने साफ किया कि सभी एजेंसियां सरकार की गाइडलाइन का पूरी तरह पालन करें। न्यूनतम वेतन नियम लागू करना अनिवार्य है और इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हाई लेवल कमेटी की सलाह
राज्य सरकार द्वारा बनाई गई हाई लेवल कमेटी ने भी एजेंसियों को निर्देश दिए। अधिकारियों ने कहा कि श्रमिकों को अनुशासित रखा जाए और उन्हें ट्रेनिंग दी जाए, ताकि कोई अव्यवस्था न हो। श्रमिकों के लिए पुलिस वेरिफिकेशन, भविष्य निधि और ईएसआई जैसी सुविधाएं अनिवार्य करने को कहा गया है। साथ ही, मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है।



