ग्रेटर नोएडा के हल्दौनी गांव में छह साल की बच्ची के लापता होने के बाद हड़कंप मच गया। परिवार की शिकायत पर ईकोटेक-3 थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने बच्ची की तलाश के लिए तत्काल पांच टीमें गठित कीं। जांच के दौरान पुलिस ने इलाके में लगे कई सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इन्हीं फुटेज के आधार पर पुलिस को संदिग्ध आरोपी की पहचान करने में मदद मिली। बाद में तलाश तेज करते हुए पुलिस टीम आरोपी तक पहुंची।
बोरी में शव
पुलिस के मुताबिक, आरोपी की पहचान बलराज के तौर पर हुई है। जांच में सामने आया कि बच्ची की हत्या के बाद आरोपी शव को बोरी में भरकर ले गया था। पुलिस ने बच्ची का शव बरामद करने के बाद मामले की जांच तेज कर दी थी। घटना को लेकर इलाके में भी काफी आक्रोश था। पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश शुरू कर दी थी और सीसीटीवी के जरिए उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी।
मुठभेड़ में मौत
पुलिस का कहना है कि आरोपी को पकड़ने पहुंची टीम को देखकर बलराज ने भागने की कोशिश की और पुलिस पर फायरिंग कर दी। इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें आरोपी को गोली लगी। वह गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस उसे तत्काल नजदीकी अस्पताल लेकर पहुंची, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। इस तरह बच्ची की हत्या के मामले में पुलिस ने घटना के कुछ ही घंटों के भीतर आरोपी को मुठभेड़ में ढेर करने का दावा किया है।
यूपी में कार्रवाई
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के करीब नौ साल के कार्यकाल के दौरान पुलिस मुठभेड़ों के आंकड़े भी सामने आए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में 17 हजार से ज्यादा मुठभेड़ हुईं। इनमें 289 अपराधी मारे गए, जबकि 11 हजार से अधिक अपराधी घायल हुए। मेरठ जोन मुठभेड़ के मामलों में सबसे आगे रहा। यहां 4,813 कार्रवाई में 8,921 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया और 3,513 घायल हुए। पुलिस के मुताबिक 97 कुख्यात अपराधी मुठभेड़ में मारे गए। इस दौरान 477 पुलिसकर्मी घायल हुए और दो पुलिसकर्मी शहीद हुए।
दूसरे जोन आगे
वाराणसी जोन में 1,292 मुठभेड़ों के दौरान 2,426 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया और 29 अपराधी मारे गए। यहां 907 अपराधी और 104 पुलिसकर्मी घायल हुए। आगरा जोन में 2,494 मुठभेड़ हुईं, जिनमें 5,845 अपराधी गिरफ्तार किए गए और 968 घायल हुए। 24 अपराधी मारे गए तथा 62 पुलिसकर्मी घायल हुए। बरेली जोन में 2,222 मुठभेड़ों में 21 अपराधी मारे गए, जबकि लखनऊ जोन में 971 मुठभेड़ों के दौरान 20 अपराधी मारे गए।
कमिश्नरेट आंकड़े
गाजियाबाद कमिश्नरी में 789 मुठभेड़ों के दौरान 18 अपराधी मारे गए। कानपुर जोन में 791 मुठभेड़ों में 12 और लखनऊ कमिश्नरी में 147 मुठभेड़ों में 12 अपराधी मारे गए। प्रयागराज जोन में 643 मुठभेड़ों में 11 अपराधी मारे गए। आगरा कमिश्नरी में 489 मुठभेड़ों के दौरान 10, गौतमबुद्ध नगर में 1,144 मुठभेड़ों में 9 और गोरखपुर जोन में 699 मुठभेड़ों में 8 अपराधी मारे गए। वाराणसी, प्रयागराज और कानपुर कमिश्नरेट में क्रमशः 8, 6 और 4 अपराधियों के मारे जाने का आंकड़ा दर्ज किया गया है।









