Noida factories 2 shift system: Noida की औद्योगिक इकाइयों में 1 मई 2026 से काम करने का तरीका बदलने जा रहा है। अब ज्यादातर फैक्ट्रियों में दो शिफ्ट में काम कराया जाएगा। यह फैसला उद्यमियों ने हाल ही में हुए श्रमिक आंदोलन और उसके बाद बने फैसलों को देखते हुए लिया है। इसका मुख्य उद्देश्य ओवरटाइम के खर्च से बचना है।
श्रमिक आंदोलन के बाद लिया फैसला
दरअसल, 13 अप्रैल को नोएडा के कई औद्योगिक इलाकों में मजदूरों ने वेतन बढ़ाने और ओवरटाइम का दोगुना पैसा देने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। कई जगह यह प्रदर्शन उग्र भी हो गया था। इसके बाद एक हाईपॉवर कमेटी बनाई गई, जिसने न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने और ओवरटाइम का डबल भुगतान देने की सिफारिश की। इसी फैसले से बचने के लिए अब फैक्ट्री मालिकों ने नया रास्ता निकाला है। उन्होंने ओवरटाइम खत्म कर दो शिफ्ट सिस्टम लागू करने का निर्णय लिया है। इससे उन्हें अतिरिक्त भुगतान नहीं करना पड़ेगा और खर्च भी कंट्रोल में रहेगा।
दो शिफ्ट में ऐसे होगा काम
नई व्यवस्था के तहत पहली शिफ्ट सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलेगी। वहीं दूसरी शिफ्ट दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक होगी। इस सिस्टम में मजदूरों को ओवरटाइम करने का विकल्प नहीं मिलेगा। यानी अब उन्हें तय समय के अनुसार ही काम करना होगा।
रोजगार के नए मौके बनेंगे
उद्यमियों का कहना है कि इस बदलाव से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। पहले जहां एक कर्मचारी से 4 घंटे अतिरिक्त काम लिया जाता था, अब उसी काम के लिए नई शिफ्ट में अलग कर्मचारी रखा जाएगा। इससे कई लोगों को नौकरी मिलने की संभावना बढ़ेगी।
लागत संतुलन का तरीका
नोएडा एंटरप्रिनियोर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सुधीर श्रीवास्तव के अनुसार, न्यूनतम मजदूरी बढ़ने से उत्पादन की लागत भी बढ़ेगी। ऐसे में कंपनियों को अपने खर्च को संतुलित करना जरूरी है। इसी वजह से 4 घंटे ओवरटाइम की जगह 8 घंटे की नई शिफ्ट शुरू करने का फैसला लिया गया है। कई कंपनियों में इसकी शुरुआत हो चुकी है और कुछ में भर्ती प्रक्रिया जारी है।
आगे 16 घंटे संचालन की योजना
नई व्यवस्था को देखते हुए कई फैक्ट्रियां 16 घंटे तक उत्पादन चलाने की योजना बना रही हैं। इसके लिए बिजली, जनरेटर और अन्य खर्चों का आकलन किया जा रहा है, ताकि उत्पादन पर कोई असर न पड़े।
फायदा और नुकसान दोनों
इस फैसले का फायदा यह होगा कि ज्यादा लोगों को रोजगार मिलेगा। लेकिन नुकसान उन मजदूरों को होगा, जो ओवरटाइम करके ज्यादा कमाई करते थे। अब उनकी आमदनी सीमित हो जाएगी और उन्हें सिर्फ तय वेतन पर निर्भर रहना पड़ेगा।








