Champat Rai Resignation Row: बिजनौर स्थित पुश्तैनी घर में हमारे सहयोगी संजीव शर्मा से बातचीत के दौरान चंपत राय के भाई सुनील बंसल ने अपने भाई का खुलकर बचाव किया। उन्होंने कहा कि चंपत राय का पूरा जीवन ईमानदारी, सादगी और सेवा के लिए समर्पित रहा है। उनके मुताबिक, आज जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे किसी सच्चाई पर नहीं बल्कि एक सोची-समझी योजना का हिस्सा हैं।
आरोपों को बताया साजिश
सुनील बंसल ने कहा कि उनके भाई पिछले करीब 50 साल से पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर चंपत राय की छवि खराब करना चाहते हैं। उनका कहना है कि विरोधियों का मकसद हिंदुत्व, भाजपा और चंपत राय की पहचान को नुकसान पहुंचाना है। साथ ही, वे चाहते हैं कि किसी तरह चंपत राय अपने पद से हट जाएं और उनकी जगह कोई दूसरा व्यक्ति आ जाए।
विश्वास तोड़ने वालों पर जताई नाराजगी
सुनील बंसल ने कहा कि चंपत राय ने कभी किसी के साथ गलत नहीं किया। उन्होंने दावा किया कि जिन लोगों पर एसआईटी ने कार्रवाई की है, उन्हीं लोगों ने चंपत राय का भरोसा तोड़ा और उनके साथ विश्वासघात किया। उनके मुताबिक, गलती करने वाले लोग दूसरे हैं, लेकिन निशाना चंपत राय को बनाया जा रहा है।
परिवार से बना रखी है दूरी
बातचीत के दौरान सुनील बंसल भावुक भी नजर आए। उन्होंने बताया कि चंपत राय पूरी तरह अपने काम और भगवान राम की सेवा में लगे रहते हैं। परिवार से उनका बहुत कम संपर्क रहता है। उन्होंने कहा कि पिछले करीब 10 साल से चंपत राय घर नहीं आए हैं। परिवार के लोग फोन करते हैं, लेकिन अक्सर वह फोन भी नहीं उठा पाते। कभी-कभी बात हो जाती है तो सिर्फ हालचाल पूछ लेते हैं।
2014 में आखिरी बार आए थे घर
सुनील बंसल ने बताया कि साल 2014 में एक पारिवारिक शादी में चंपत राय करीब दो घंटे के लिए आए थे। उसके बाद से आज तक वह अपने घर नहीं लौटे। उनका पूरा समय सामाजिक और धार्मिक कार्यों में ही बीतता है।
विपक्ष को दी खुली चुनौती
सुनील बंसल ने समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर कोई यह साबित कर दे कि चंपत राय ने संपत्ति बनाई है, तो उनकी पूरी संपत्ति पर बुलडोजर चला दिया जाए और उसे अपने नाम कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि चंपत राय के पास संपत्ति के नाम पर सिर्फ एक थैला, एक कुर्ता और एक धोती है। उनका जीवन पूरी तरह सादगी से भरा हुआ है।
प्रोफेसर से बने राम मंदिर आंदोलन का अहम चेहरा
चंपत राय ने फिजिक्स में एमएससी करने के बाद बिजनौर के धामपुर स्थित आरएसएम डिग्री कॉलेज में फिजिक्स के लेक्चरर के रूप में अपना करियर शुरू किया था। छात्र जीवन से ही उनका जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से था। साल 1980 में उन्होंने नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह संघ तथा विश्व हिंदू परिषद के पूर्णकालिक प्रचारक बन गए। राम मंदिर आंदोलन से लेकर मंदिर निर्माण और ट्रस्ट के गठन तक उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इस्तीफे की खबरों पर बना हुआ है संशय
पिछले कुछ दिनों से चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की खबरें लगातार चर्चा में हैं। इस पर सुनील बंसल ने कहा कि अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। उनका कहना है कि अगर इस्तीफे की पेशकश की भी गई होगी, तो वह केवल नैतिक जिम्मेदारी के आधार पर होगी। वहीं, ट्रस्ट के पदाधिकारी गोपाल राव ने भी साफ कहा है कि इस्तीफे की खबरें सही नहीं हैं। फिलहाल पूरे मामले पर लोगों की नजर बनी हुई है।








