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Garuda Purana: किन लोगों के पास नहीं आते यमदूत? गरुड़ पुराण में बताए गए हैं ये विशेष गुण

गरुड़ पुराण के अनुसार ईश्वर के सच्चे भक्त, निस्वार्थ भाव से सेवा करने वाले और सत्य व धर्म के मार्ग पर चलने वाले लोगों के पास यमदूत नहीं आते। धार्मिक मान्यता है कि ऐसे पुण्यात्माओं को भगवान के दिव्य पार्षद अपने साथ ले जाते हैं।

by Sadaf Farooqui
जुलाई 6, 2026
in धर्म
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Garuda Purana: मृत्यु जीवन का अटल सत्य है और हिंदू धर्मग्रंथ गरुड़ पुराण में मृत्यु, कर्म और मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा का विस्तृत वर्णन मिलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब किसी व्यक्ति का अंतिम समय आता है तो यमराज के दूत उसकी आत्मा को लेने आते हैं। हालांकि, गरुड़ पुराण में ऐसे लोगों का भी उल्लेख मिलता है जिनके पास यमदूत नहीं पहुंचते। मान्यता है कि ऐसे पुण्यात्माओं को लेने के लिए स्वयं भगवान के दिव्य पार्षद आते हैं।

ईश्वर की भक्ति में लीन रहने वाले

गरुड़ पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति जीवनभर भगवान का स्मरण, भक्ति और नामजप करता है, उसका अंत समय शांतिपूर्ण माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि ऐसे भक्तों के पास यमदूत नहीं आते, बल्कि भगवान विष्णु के पार्षद (विष्णुदूत) उनकी आत्मा को सम्मानपूर्वक अपने साथ ले जाते हैं। कहा जाता है कि ऐसे लोगों के मन में मृत्यु का भय भी नहीं रहता।

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निस्वार्थ भाव से सेवा करने वाले

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भूखों को भोजन कराना, जरूरतमंदों की सहायता करना, बीमारों की सेवा करना और बिना किसी स्वार्थ के समाज की भलाई करना महान पुण्य माना गया है। गरुड़ पुराण में कहा गया है कि ऐसे परोपकारी लोगों के शुभ कर्म उन्हें विशेष आध्यात्मिक फल प्रदान करते हैं। मान्यता है कि उनके प्रति यमदूत भी कठोर व्यवहार नहीं करते।

सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वाले

गरुड़ पुराण में सत्य, ईमानदारी और धर्मपालन को जीवन का सर्वोच्च आचरण बताया गया है। जो व्यक्ति माता-पिता की सेवा करता है, किसी के साथ छल-कपट नहीं करता और सदैव धर्म के मार्ग पर चलता है, उसे विशेष पुण्य का भागी माना गया है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, ऐसे लोगों को मृत्यु के समय कम कष्ट होता है और उनकी आत्मा को श्रेष्ठ लोकों की प्राप्ति होती है।

क्या संदेश देता है गरुड़ पुराण?

गरुड़ पुराण का मूल संदेश यही है कि मनुष्य को अच्छे कर्म, सत्य, सेवा और ईश्वर भक्ति का मार्ग अपनाना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्यक्ति के कर्म ही उसके भविष्य और मृत्यु के बाद की यात्रा का आधार बनते हैं। इसलिए जीवन में सदाचार और परोपकार को सबसे बड़ा धर्म माना गया है।

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। News1 india इसकी पुष्टि नहीं करता है।

Tags: #Dharmaindu ReligionVishnudoot
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Sadaf Farooqui

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