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Kerala Temple: इस मंदिर में पूजा के लिए पुरुष बनते हैं महिलाएं, सारी से ले कर करते हैं सभी श्रृंगार जानें क्या है ये अनोखी परंपरा

केरल के कोल्लम स्थित कोट्टानकुलंगारा श्री देवी मंदिर में चमायाविलक्कु उत्सव के दौरान पुरुष श्रद्धालु महिलाओं की तरह सजकर देवी की पूजा करते हैं। साड़ी, गहने और मेकअप के साथ वे हाथ में दीप लेकर मंदिर पहुंचते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार यह परंपरा चरवाहे लड़कों से जुड़ी एक प्राचीन कथा से शुरू हुई थी।

by Sadaf Farooqui
अगस्त 8, 2026
in धर्म
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Kerala Temple: भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं अपनी विविधता के लिए जानी जाती हैं। केरल के कोल्लम स्थित कोट्टानकुलंगारा श्री देवी मंदिर में एक ऐसी ही अनोखी परंपरा निभाई जाती है, जिसमें पुरुष श्रद्धालु महिलाओं का रूप धारण करके देवी की पूजा करते हैं।

हर साल यहां आयोजित होने वाले चमायाविलक्कु उत्सव के दौरान पुरुष साड़ी पहनते हैं, गहने लगाते हैं और मेकअप करके महिलाओं की तरह तैयार होते हैं। कई श्रद्धालु दाढ़ी-मूंछ भी साफ करवाते हैं और बालों में फूल लगाकर पूजा में शामिल होते हैं।

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10 से 12 दिनों तक चलता है उत्सव

यह पारंपरिक उत्सव आमतौर पर मार्च के आसपास आयोजित किया जाता है और करीब 10 से 12 दिनों तक चलता है। उत्सव के अंतिम दिन पुरुष श्रद्धालु विशेष रूप से सजकर मंदिर पहुंचते हैं।

स्थानीय लोगों के अलावा केरल के दूसरे हिस्सों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस परंपरा में शामिल होने आते हैं। ट्रांसजेंडर समुदाय के लोग भी इस उत्सव में भाग लेते हैं।

क्या है पुरुषों के महिला बनने की मान्यता?

स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस परंपरा का संबंध चरवाहे लड़कों की एक पुरानी कथा से है। कहा जाता है कि वर्षों पहले कुछ चरवाहे लड़के लड़कियों का रूप धारण करके एक पत्थर के पास खेला करते थे, जिसे वे देवी के रूप में पूजते थे।

मान्यता है कि एक दिन उसी पत्थर से देवी प्रकट हुईं। इसके बाद गांव में यह खबर फैल गई और देवी के सम्मान में यहां मंदिर का निर्माण कराया गया। समय के साथ पुरुषों के महिलाओं की तरह सजने और देवी की आराधना करने की परंपरा इस उत्सव का हिस्सा बन गई।

हाथ में दीप लेकर पहुंचते हैं श्रद्धालु

चमायाविलक्कु उत्सव में श्रद्धालु महिलाओं की तरह सजने के बाद अपने हाथ में जलता हुआ दीपक लेकर मंदिर पहुंचते हैं। मान्यता है कि सुबह 2 बजे से 5 बजे के बीच का समय पूजा के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से देवी की आराधना करने पर उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही आस्था इस अनोखी परंपरा को हर साल बड़ी संख्या में लोगों से जोड़ती है।

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। News1 india इसकी पुष्टि नहीं करता है।

Tags: Kerala TempleKottankulangara Temple
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Sadaf Farooqui

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