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संगीत सोम ने ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर रची राजनीति, जाने क्या होगा 2022 में ?

by Web Desk
मई 10, 2022
in धर्म, वाराणसी
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बीजेपी नेता संगीत सोम अपने विवादित बयान के घेरे में एक बार फिर आ चुके है. इस बार महाराणा प्रताप जयंती के आयोजन पर उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर विवादित बयान दे दिया, बोले- जो 1992 में हुआ, वो 2022 में होगा, 1992 से दोगुना ताकत है युवाओं में. साथ ही उन्होने ये कहा की जब बाहर लोगो को पता चलेगा की मस्जिद के अन्दर देवी-देवताओ की मूर्तिया, प्रतिमा है तो क्या होगा बाहर, उन्होंने युवाओं के जोश की भी बात की, इस तरह से लेकर उन्होंने ये विवादित बयान दिया है.वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर से सटी ज्ञानवापी मस्जिद एक बार फिर चर्चा में है।

औरंगजेब के शासन में मंदिर हुआ ध्वस्त  

लोगों का दावा है कि ज्ञानवापी मस्जिद को औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ मंदिर तुड़वाकर बनवाया था। मंदिर-मस्जिद का ये विवाद वर्षों पुराना है और इसे लेकर 213 साल पहले दंगे भी हुए थे। आजादी के बाद इस मुद्दे को लेकर कोई दंगा नहीं हुआ। ज्ञानवापी को हटाकर उसकी जमीन काशी विश्वनाथ मंदिर को सौंपने को लेकर दायर पहली याचिका अयोध्या में राम मंदिर मुद्दा गर्माने के बाद 1991 में दाखिल हुई थी। मान्यता है कि 1669 में औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ मंदिर का एक हिस्सा तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद बनवाई थी। कुछ इतिहासकार कहते हैं कि 14वीं सदी में जौनपुर के शर्की सुल्तान ने मंदिर को तुड़वाकर ज्ञानवापी मस्जिद बनवाई थी।

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कुछ मान्यताओं के अनुसार अकबर ने 1585 में नए मजहब दीन-ए-इलाही के तहत विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद बनवाई थी।

मस्जिद और विश्वनाथ मंदिर के बीच 10 फीट गहरा कुआं है, जिसे ज्ञानवापी कहा जाता है। इसी कुएं के नाम पर मस्जिद का नाम पड़ा। स्कंद पुराण में कहा गया है कि भगवान शिव ने स्वयं लिंगाभिषेक के लिए अपने त्रिशूल से ये कुआं बनाया था। शिवजी ने यहीं अपनी पत्नी पार्वती को ज्ञान दिया था, इसलिए इस जगह का नाम ज्ञानवापी या ज्ञान का कुआं पड़ा। 

कोर्ट ने दिए आदेश

ताजा विवाद ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में श्रृंगार गौरी और अन्य देवी-देवताओं की रोजाना पूजा- 18 अगस्त 2021 को 5 महिलाएं ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में मां श्रृंगार गौरी, गणेश जी, हनुमान जी समेत परिसर में मौजूद अन्य देवताओं की रोजाना पूजा की इजाजत मांगते हुए कोर्ट पहुंची थीं।

26 अप्रैल 2022 को वाराणसी सिविल कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में श्रृंगार गौरी और अन्य देव विग्रहों के सत्यापन के लिए वीडियोग्राफी और सर्वे का आदेश दिया था।

कोर्ट के आदेश के बावजूद मुस्लिम पक्ष के भारी विरोध की वजह से यहां 6 मई को शुरू हुआ 3 दिन के सर्वे का काम पूरा नहीं हो पाया। इस मामले में 10 मई को फिर से सुनवाई होगी। माना जा रहा है कि इस सुनवाई में कोर्ट ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे की नई तारीख देने वाला है।

मुस्लिम पक्ष सर्वे के लिए मस्जिद के अंदर जाने को गलत बता रहा है। हिंदू पक्ष का कहना है कि शृंगार देवी के अस्तित्व के प्रमाण के लिए पूरे परिसर का सर्वे जरूरी है।

मंदिर-मस्जिद के बीच कई बार हुए दंगे

माना जाता है कि ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण औरंगजेब ने 1699 में काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर कराया था।

मंदिर-मस्जिद को लेकर कई बार विवाद हुए हैं, लेकिन ये विवाद आजादी से पहले के हैं। 1809 में जब हिंदुओं ने विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद के बीच एक छोटा स्थल बनाने की कोशिश की थी, तब भीषण दंगे हुए थे।

1991 में काशी विश्वनाथ मंदिर के पुरोहितों के वंशजों ने वाराणसी सिविल कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में कहा कि मूल मंदिर को 2050 साल पहले राजा विक्रमादित्य ने बनवाया था। 1669 में औरंगजेब ने इसे तोड़कर मस्जिद बनवाई।

याचिका में कहा गया कि मस्जिद में मंदिर के अवशेषों का इस्तेमाल हुआ इसलिए यह जमीन हिंदू समुदाय को वापस दी जाए। याचिका के मुताबिक केस में प्लेसेस ऑफ वरशिप एक्ट 1991 लागू नहीं होता, क्योंकि मस्जिद को मंदिर के अवशेषों से बनाया था ​​​​​​।

1998 में ज्ञानवापी मस्जिद की देखरेख करने वाली कमेटी अंजमुन इंतजामिया इसके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंची। कमेटी ने कहा कि इस विवाद में कोई फैसला नहीं लिया जा सकता, क्योंकि प्लेसेस ऑफ वरशिप एक्ट के तहत इसकी मनाही है। इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।

2019 में विजय शंकर रस्तोगी ने वाराणसी जिला अदालत में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के आर्कियोलॉजिकल सर्वे कराने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की।

हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद 2019 में वाराणसी कोर्ट में फिर से इस मामले में सुनवाई शुरू हुई।

2020 में अंजुमन इंतजामिया ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे कराए जाने की याचिका का विरोध किया। इसी साल रस्तोगी ने हाईकोर्ट द्वारा स्टे नहीं बढ़ाने का हवाला देते हुए निचली अदालत से सुनवाई फिर शुरू करने की अपील की।

(By: ABHINAV SHUKLA)

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