Hindu Cremation Rituals:समाजवादी पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का अंतिम संस्कार लखनऊ के भैंसा कुंड घाट पर पूरे विधि-विधान से किया गया। पत्नी अपर्णा यादव के पिता अरविंद सिंह बिष्ट ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान अखिलेश यादव, शिवपाल यादव समेत परिवार के सदस्य, राजनीतिक नेता और करीबी मौजूद रहे। प्रतीक यादव अब पंचतत्व में विलीन हो चुके हैं, लेकिन उनके अंतिम संस्कार के बाद हिंदू धर्म में दाह संस्कार की परंपरा को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
हिंदू धर्म में दाह संस्कार का महत्व
हिंदू धर्म में मृत्यु को जीवन का अंत नहीं बल्कि आत्मा की नई यात्रा की शुरुआत माना गया है। दाह संस्कार हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में अंतिम संस्कार माना जाता है। इसका उद्देश्य शरीर को पंचतत्वों में विलीन करना और आत्मा को सांसारिक मोह से मुक्त करना होता है।
पंचतत्वों में शरीर का विलय
हिंदू दर्शन के अनुसार शरीर पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से मिलकर बना है। मृत्यु के बाद अग्नि के माध्यम से शरीर को इन मूल तत्वों में वापस मिलाया जाता है। अग्नि को शुद्ध करने वाला तत्व माना गया है, जो शरीर को प्रकृति में विलीन कर देती है।
आत्मा को मोह से मुक्ति दिलाने की मान्यता
गरुड़ पुराण और अन्य धर्मग्रंथों के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा का अपने शरीर और परिवार से मोह बना रहता है। जब शरीर पूरी तरह राख में बदल जाता है, तब आत्मा सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर आगे की यात्रा पर निकलती है। इसी कारण दाह संस्कार को मोक्ष का माध्यम भी माना जाता है।
वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक कारण भी अहम
वैज्ञानिक दृष्टि से मृत्यु के बाद शरीर में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। दाह संस्कार शरीर को पूरी तरह नष्ट कर संक्रमण रोकने का प्रभावी तरीका माना जाता है। वहीं मनोवैज्ञानिक रूप से अंतिम संस्कार परिवार को यह स्वीकार करने में मदद करता है कि प्रिय व्यक्ति अब इस संसार में नहीं है।
किन समुदायों में नहीं होता दाह संस्कार?
लिंगायत और बिश्नोई समुदाय में दफनाने की परंपरा
दक्षिण भारत के लिंगायत समुदाय और राजस्थान के बिश्नोई समाज में शव को जलाने की बजाय दफनाने की परंपरा है। बिश्नोई समुदाय पर्यावरण संरक्षण के कारण दाह संस्कार से बचता है।
साधु-संत और छोटे बच्चों को दी जाती है समाधि
नागा साधु, संन्यासी और छोटे बच्चों का भी कई जगह दाह संस्कार नहीं किया जाता। इन्हें भू-समाधि या जल-समाधि दी जाती है, क्योंकि इन्हें सांसारिक मोह से मुक्त और पवित्र माना जाता है।







