FIFA World Cup 2026 Hydration Break: फीफा वर्ल्ड कप 2026 में पहली बार हाइड्रेशन ब्रेक की व्यवस्था की गई है। अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में पड़ रही तेज गर्मी को देखते हुए खिलाड़ियों की सेहत को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया गया। हालांकि अब इस नियम को लेकर फुटबॉल जगत में बहस शुरू हो गई है। कुछ लोगों का मानना है कि यह ब्रेक खिलाड़ियों के लिए राहत लेकर आया है, जबकि कई पूर्व खिलाड़ी और विशेषज्ञ इसे खेल की लय बिगाड़ने वाला कदम बता रहे हैं।
क्यूरासाओ और जर्मनी मैच से शुरू हुई चर्चा
इस बहस की सबसे बड़ी वजह क्यूरासाओ और जर्मनी के बीच खेला गया मुकाबला बना। मैच के दौरान क्यूरासाओ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जर्मनी के खिलाफ गोल दागकर स्कोर 1-1 कर दिया था। उस समय ऐसा लग रहा था कि मैच में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। लेकिन इसी दौरान हाइड्रेशन ब्रेक हुआ। ब्रेक के बाद क्यूरासाओ की टीम अपनी पकड़ बनाए नहीं रख सकी। जर्मनी ने पहले हाफ खत्म होने से पहले लगातार दो गोल कर दिए और अंत में मुकाबला 7-1 से जीत लिया।
एलन शियरर ने जताई नाराजगी
इंग्लैंड के पूर्व स्ट्राइकर एलन शियरर ने इस मामले पर अपनी राय रखते हुए कहा कि क्यूरासाओ की टीम की लय टूट गई थी। उनके अनुसार, गोल करने के कुछ ही सेकंड बाद खेल रुक गया, जिससे खिलाड़ियों का आत्मविश्वास और मैच की गति प्रभावित हुई। शियरर का मानना है कि ऐसे ब्रेक कई बार उस टीम को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जो मैच में बेहतर प्रदर्शन कर रही होती है।
रॉय कीन ने भी उठाए सवाल
आयरलैंड के पूर्व कप्तान रॉय कीन ने भी इस नियम पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि फुटबॉल की सबसे बड़ी खूबी उसकी तेज रफ्तार और लगातार चलने वाला खेल है। कीन के मुताबिक, हाइड्रेशन ब्रेक किसी टाइम आउट की तरह काम कर रहा है, जिससे मैच का प्रवाह रुक जाता है। उनका कहना है कि इससे कोचों को नई रणनीति बनाने और विरोधी टीम की लय तोड़ने का मौका मिल जाता है।
आंकड़े भी बढ़ा रहे हैं चर्चा
टूर्नामेंट के शुरुआती मुकाबलों के आंकड़े भी इस बहस को हवा दे रहे हैं। शुरुआती 16 मैचों में से 8 मुकाबलों में हाइड्रेशन ब्रेक के लगभग 10 मिनट के भीतर गोल देखने को मिले। ब्राजील और मोरक्को के मैच में भी ऐसा ही हुआ। मोरक्को ने ब्रेक से ठीक पहले बढ़त हासिल की थी, लेकिन खेल दोबारा शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद ब्राजील ने बराबरी का गोल कर दिया। इसके अलावा कनाडा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, स्कॉटलैंड, स्वीडन और ईरान जैसी टीमों को भी ब्रेक के बाद गोल करने का फायदा मिला।
फीफा के सामने संतुलन की चुनौती
हालांकि फीफा का कहना है कि खिलाड़ियों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है। कई मेजबान शहरों में तापमान 32 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच रहा है, जिससे खिलाड़ियों पर शारीरिक दबाव बढ़ सकता है। अब सवाल यह है कि क्या खिलाड़ियों की सेहत के लिए जरूरी यह कदम खेल की लय पर भारी पड़ रहा है, या फिर यह आधुनिक फुटबॉल की नई जरूरत है। आने वाले मैचों में इस बहस पर और चर्चाएं देखने को मिल सकती हैं।
