Damayanti Sen Returns in Bengal Inquiry Panel: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। राज्य सरकार ने महिलाओं, बच्चों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हुए अत्याचारों की जांच के लिए एक विशेष आयोग बनाया है। इस आयोग में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी दमयंती सेन को अहम जिम्मेदारी दी गई है। उनकी वापसी ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है, क्योंकि एक समय ऐसा भी था जब उन्हें चर्चित मामलों से दूर कर दिया गया था।
कौन हैं दमयंती सेन?
दमयंती सेन 1996 बैच की तेजतर्रार और ईमानदार आईपीएस अधिकारी हैं। वह कोलकाता पुलिस की पहली महिला जॉइंट कमिश्नर (क्राइम) रह चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने स्पेशल कमिश्नर के पद पर भी काम किया। साल 2023 में उन्हें एडीजी ट्रेनिंग बनाया गया था। उनकी पहचान एक सख्त और निष्पक्ष अधिकारी के रूप में रही है।
जस्टिस समाप्ति चटर्जी को बनाया गया अध्यक्ष
इस विशेष आयोग की अध्यक्षता कलकत्ता हाई कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस समाप्ति चटर्जी करेंगी। वहीं दमयंती सेन को आयोग का सदस्य सचिव बनाया गया है। आयोग का मुख्य काम महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हुए गंभीर मामलों की जांच करना होगा।
आयोग किन मामलों की जांच करेगा?
यह आयोग पिछले शासनकाल में हुए कई बड़े मामलों की दोबारा जांच करेगा। इनमें संदेशखाली, बोगतुई और कस्बा जैसे चर्चित मामले शामिल हैं। आयोग पूरे पश्चिम बंगाल में काम करेगा, लेकिन उन इलाकों पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा जहां महिलाओं के खिलाफ हिंसा और उत्पीड़न की घटनाएं सामने आई थीं।
संदेशखाली मामला
संदेशखाली में महिलाओं के साथ कथित उत्पीड़न, यौन शोषण और जमीन कब्जाने जैसे गंभीर आरोप लगे थे। आयोग इन सभी मामलों की विस्तार से जांच करेगा।
बोगतुई हिंसा
बोगतुई में हुई हिंसा और आगजनी की घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था। इस मामले में कई लोगों की जान गई थी। आयोग यह पता लगाएगा कि घटना के पीछे कौन लोग जिम्मेदार थे और प्रशासन की क्या भूमिका रही।
कस्बा क्षेत्र के मामले
कस्बा इलाके में महिलाओं से जुड़े कई संवेदनशील अपराध सामने आए थे। आयोग इन मामलों की फाइलें फिर से खोलेगा और नई जांच करेगा।
क्यों चर्चा में हैं दमयंती सेन?
दमयंती सेन का नाम सबसे ज्यादा 2012 के पार्क स्ट्रीट गैंगरेप केस के दौरान चर्चा में आया था। उस समय उन्होंने राजनीतिक दबाव के बावजूद मामले की सच्चाई सामने लाने में अहम भूमिका निभाई थी।
6 फरवरी 2012 को पार्क स्ट्रीट इलाके में एक महिला के साथ चलती कार में सामूहिक दुष्कर्म हुआ था। दमयंती सेन की टीम ने कुछ ही दिनों में आरोपियों को पकड़ लिया और वैज्ञानिक सबूतों के जरिए अपराध साबित किया। लेकिन इस मामले के बाद उन्हें महत्वपूर्ण पद से हटाकर ट्रेनिंग कॉलेज भेज दिया गया। लंबे समय तक उन्हें किसी बड़े या राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले से दूर रखा गया।
अब इतने सालों बाद उनकी वापसी को लोग “वक्त का पहिया घूमना” बता रहे हैं।
1 जून से शुरू होगा आयोग का काम
यह आयोग 1 जून 2026 से अपना काम शुरू करेगा। लोगों की शिकायतें सीधे पुलिस थानों में जनसुनवाई की तरह दर्ज की जाएंगी। फिलहाल अधिकारी जरूरी दस्तावेज और जानकारी इकट्ठा करने में जुटे हुए हैं।
