NDA New Political Equation: पश्चिम बंगाल की राजनीति में हुए बदलाव का असर अब राष्ट्रीय राजनीति में भी दिखाई दे रहा है। दावा किया जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी के 20 सांसदों ने अलग गुट बनाकर एनडीए को समर्थन देने का फैसला किया है। इसके बाद केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन की संख्या और मजबूत होने की बात कही जा रही है।
एनडीए की संख्या में बढ़ोतरी
2024 लोकसभा चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी को 240 सीटें मिली थीं। यह आंकड़ा बहुमत के लिए जरूरी 272 सीटों से कम था। सरकार बनाने के लिए बीजेपी को अपने सहयोगी दलों के समर्थन की जरूरत पड़ी थी। टीडीपी, जेडीयू और अन्य सहयोगी दलों के साथ एनडीए ने सरकार बनाई।
अब टीएमसी के 20 सांसदों के समर्थन से गठबंधन की संख्या बढ़ने का दावा किया जा रहा है। इससे एनडीए के पास बहुमत के आंकड़े से ज्यादा सांसद होने की बात कही जा रही है।
नीतीश और नायडू की भूमिका पर चर्चा
इस नए राजनीतिक समीकरण के बाद बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड के नेता नीतीश कुमार तथा तेलुगु देशम पार्टी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पहले दोनों नेताओं को केंद्र सरकार के लिए महत्वपूर्ण सहयोगी माना जाता था।
ऐसा माना जाता था कि सरकार के बड़े फैसलों में इन दलों की राय अहम हो सकती है। लेकिन नए समीकरण के बाद उनकी राजनीतिक ताकत को लेकर अलग-अलग चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
पहले सहयोगियों की थी अहम जरूरत
लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी को सरकार चलाने के लिए सहयोगी दलों पर निर्भर रहना पड़ा था। इसी वजह से जेडीयू और टीडीपी जैसे दलों की मांगों को महत्व मिलने की बात कही जाती थी। कई मुद्दों पर सहयोगी दल अपनी राय मजबूती से रखते थे।
अब अगर एनडीए के पास पर्याप्त संख्या बल रहता है, तो सरकार की निर्भरता कम होने की संभावना जताई जा रही है।
मंत्रिमंडल विस्तार पर भी असर
पहले ऐसी अटकलें थीं कि केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार में जेडीयू को एक और मंत्री पद मिल सकता है। माना जा रहा था कि नीतीश कुमार केंद्र में अपनी पार्टी के लिए बड़ी जिम्मेदारी चाहते हैं।
हालांकि नए राजनीतिक समीकरण के बाद ऐसी संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई है कि जेडीयू की मांगों पर पहले जैसी निर्भरता शायद नहीं रहेगी।
आगे की राजनीति पर नजर
राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले समय में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के बीच संबंध किस दिशा में जाते हैं। हालांकि किसी भी राजनीतिक बदलाव की तस्वीर पूरी तरह तभी साफ होगी, जब सभी दलों की आधिकारिक स्थिति सामने आएगी।
फिलहाल टीएमसी सांसदों के अलग रुख और एनडीए की संख्या को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस तेज है।
