TMC Internal Crisis: टीएमसी में बढ़ी अंदरूनी खींचतान, सांसदों को लेकर काकोली घोष के दावे से राजनीति गरमाई

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी के भीतर मतभेद बढ़ते दिख रहे हैं। सांसद काकोली घोष दस्तीदार के दावों ने पार्टी में टूट की अटकलों को तेज कर दिया है, जबकि नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।

TMC Internal Crisis West Bengal

TMC Internal Crisis West Bengal:पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सामने पार्टी को एकजुट बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी होती दिखाई दे रही है। पार्टी के भीतर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। इसी बीच लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार के एक दावे ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है।।काकोली घोष दस्तीदार का कहना है कि उनके साथ 20 लोकसभा सांसद हैं। उन्होंने कथित तौर पर लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि उनके समूह को सदन में अलग बैठने की अनुमति दी जाए।

सांसदों के समर्थन को लेकर चर्चा

लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं। ऐसे में यदि 20 सांसद किसी अलग समूह के साथ जाते हैं, तो यह संख्या काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या होने पर दल-बदल कानून से जुड़े कई सवाल भी खड़े हो सकते हैं। हालांकि 20 सांसदों के समर्थन से जुड़ी चिट्ठी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। फिर भी इस दावे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।

ऋतब्रत बनर्जी का बड़ा दावा

टीएमसी से निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी पहले ही दावा कर चुके हैं कि पार्टी के अधिकतर विधायक उनके साथ हैं। उनका कहना है कि उनका गुट ही असली तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करता है। बताया जा रहा है कि यह समूह पार्टी में अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव का विरोध कर रहा है। हालांकि यह गुट ममता बनर्जी के नेतृत्व का सम्मान करता है और चाहता है कि वह पार्टी को मार्गदर्शन देती रहें।

एनडीए को समर्थन देने की चर्चा

कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाला समूह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का समर्थन करने पर विचार कर रहा है। इस संबंध में कई बैठकों की भी चर्चा हो रही है। वहीं शुभेंदु अधिकारी और कुछ टीएमसी सांसदों के बीच मुलाकात की खबरों ने भी राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया है। हालांकि इन बैठकों को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

टीएमसी नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया

इन घटनाक्रमों के बाद टीएमसी के कई नेताओं ने नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि सांसद और विधायक पार्टी के टिकट और ममता बनर्जी के नेतृत्व में चुनाव जीतकर आए हैं। ऐसे में यदि कोई नेता पार्टी छोड़ना चाहता है, तो उसे पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। पार्टी नेताओं का कहना है कि जनता ने उन्हें टीएमसी के प्रतिनिधि के रूप में चुना था, किसी दूसरे गठबंधन के लिए नहीं। इसलिए पार्टी छोड़कर दूसरी राजनीतिक दिशा में जाना जनता के विश्वास के साथ न्याय नहीं होगा।

बंगाल की राजनीति पर सबकी नजर

कांग्रेस नेताओं ने भी इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक नाटक बताया है। उनका कहना है कि चुनाव से पहले जो नेता बीजेपी के खिलाफ प्रचार कर रहे थे, अब वही एनडीए के करीब दिखाई दे रहे हैं। इस बीच यह भी याद दिलाया जा रहा है कि काकोली घोष दस्तीदार को पहले लोकसभा में टीएमसी के चीफ व्हिप पद से हटाया जा चुका है। अब आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी के भीतर चल रहा यह विवाद किस दिशा में जाता है।

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