Bihar News: सुधाकर सिंह का खुला पत्र, किसानों की जमीन, वाटर पार्क और एफआईआर पर उठाए सवाल, मुख्यमंत्री से जांच की मांग

बिहार के पिपराकोठी वाटर पार्क विवाद में सांसद सुधाकर सिंह ने मुख्यमंत्री को खुला पत्र लिखकर प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने एफआईआर को गलत बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

Sudhakar Singh Water Park Row

Open Letter Controversy: बिहार के पिपराकोठी में प्रस्तावित वाटर पार्क को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच सांसद सुधाकर सिंह ने मुख्यमंत्री को एक खुला पत्र लिखकर जिला प्रशासन और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने अपने पत्र में कई जगह तंज कसते हुए कहा कि किसानों की जमीन से जुड़े मामले में अधिकारियों ने बेहद तेजी दिखाई, जिससे लोगों के मन में कई सवाल पैदा हो रहे हैं।

जमीन की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

सुधाकर सिंह का कहना है कि जिस जमीन पर किसान करीब 95 वर्षों से खेती कर रहे थे और जिसकी जमाबंदी भी दर्ज थी, उसे केवल 85 दिनों के भीतर रद्द कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि 22 जून को जमीन की नापी हुई और अगले ही दिन वहां निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया। सांसद ने तंज भरे अंदाज में कहा कि किसानों की खेती वाली जमीन पर मनोरंजन के लिए वाटर पार्क बनवाने वाले अधिकारियों को तो राष्ट्रपति पुरस्कार या भारत रत्न तक मिलना चाहिए।

ठेके और निर्माण कार्य पर भी सवाल

अपने पत्र में सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि कागजों में निर्माण कार्य का ठेका किसी कंपनी के नाम पर दिखाया गया है, लेकिन असल में काम अधिकारियों से जुड़े लोगों के जरिए कराया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे मामले में दखल देने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की ताकि सच्चाई सामने आ सके।

प्रदर्शन के बाद दर्ज हुई एफआईआर

दरअसल, 3 जुलाई को पिपराकोठी में बनने वाले प्रस्तावित वाटर पार्क के विरोध में सुधाकर सिंह किसानों के साथ प्रदर्शन करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने ट्रैक्टर चलाकर विवादित जमीन की जुताई की और अपना विरोध दर्ज कराया। प्रशासन का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान सरकारी काम में रुकावट डाली गई, निर्माण कार्य रोकने की कोशिश की गई और सरकारी जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया गया।

इसी मामले में पिपराकोठी थाना में कांड संख्या 361/26 दर्ज किया गया। इस एफआईआर में सुधाकर सिंह सहित 27 नामजद और 30 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने सरकारी काम में बाधा पहुंचाने समेत कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

एफआईआर को बताया गलत

सुधाकर सिंह ने अपने खुले पत्र में इस एफआईआर को पूरी तरह गलत बताया है। उनका कहना है कि इसमें कई तथ्यात्मक और भाषा संबंधी गलतियां हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एफआईआर में उन पर एक व्यक्ति की जेब से 35 हजार रुपये निकालने का आरोप लगाया गया है, जबकि पुलिस के पास इस दावे का कोई वीडियो या अन्य ठोस सबूत नहीं है।

भविष्य के आंदोलन को लेकर कही यह बात

पत्र के आखिर में सांसद ने कहा कि अगर आगे भी किसानों के समर्थन में आंदोलन करना पड़ा तो वह पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि अगली बार पुलिस किसी पर मामला दर्ज करने से पहले पूरे सबूत जुटा ले। वहीं प्रशासन का कहना है कि इस मामले की जांच कानून के मुताबिक निष्पक्ष तरीके से की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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