World’s Oldest Living Banyan Tree: बिहार के मुंगेर में मौजूद एक विशाल बरगद का पेड़ इन दिनों वैज्ञानिकों और प्रकृति प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। लखनऊ स्थित बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने इसकी उम्र का पता लगाने के लिए विशेष शोध किया। जांच के बाद वैज्ञानिकों ने दावा किया कि यह फिलहाल दुनिया का सबसे पुराना जीवित वटवृक्ष है।
यह शोध बिहार वन विभाग के अनुरोध पर शुरू किया गया था। वर्ष 2022 में संस्थान की वैज्ञानिक डॉ. त्रिना बोस और शोध छात्र अवनीश मिश्रा मुंगेर पहुंचे थे। यहां आईटीसी परिसर में स्थित इस प्राचीन बरगद की उम्र जानने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन किया गया।
पेड़ को नुकसान पहुंचाए बिना हुआ शोध
वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि पेड़ को किसी तरह का नुकसान पहुंचाए बिना उसका नमूना लिया जाए। इसी कारण मुख्य तने से नमूना नहीं लिया गया। शोधकर्ताओं ने पेड़ के पास मौजूद एक मोटे तने और उसकी सूखी जटा का छोटा हिस्सा लेकर जांच की।
इसके बाद आधुनिक रेडियोकार्बन डेटिंग तकनीक की मदद से नमूनों का विश्लेषण किया गया। इसी प्रक्रिया से पेड़ की वास्तविक उम्र का अनुमान लगाया गया।
जटाओं ने बना दिया जंगल जैसा दृश्य
यह बरगद का पेड़ अपनी विशालता और खूबसूरती के लिए भी जाना जाता है। सदियों पुराने इस वृक्ष से कई जटाएं निकल चुकी हैं। इनमें से कई जटाएं जमीन तक पहुंचकर नए तनों में बदल गई हैं।
दूर से देखने पर यह किसी एक पेड़ की तरह नहीं, बल्कि एक छोटे जंगल जैसा दिखाई देता है। पेड़ आईटीसी के शाखा प्रबंधक के आवास परिसर में स्थित है। वहां इसकी नियमित देखभाल की जाती है। सफाई, पोषण और संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता है क्योंकि इसे एक विरासत वृक्ष माना जाता है।
उम्र पता करना क्यों था मुश्किल
डॉ. त्रिना बोस के अनुसार, बरगद की उम्र का सही अनुमान लगाना आसान नहीं था। आमतौर पर पेड़ों में हर साल बनने वाले वार्षिक छल्लों यानी रिंग्स से उनकी उम्र का पता लगाया जाता है। लेकिन बरगद के पेड़ों में ऐसी रिंग्स नहीं बनतीं।
इसी वजह से पारंपरिक तरीके यहां काम नहीं आए। वैज्ञानिकों को अत्याधुनिक रेडियोकार्बन डेटिंग तकनीक का सहारा लेना पड़ा। इस तकनीक ने पेड़ की उम्र का अधिक सटीक अनुमान लगाने में मदद की।
नरोरा और कोलकाता के वटवृक्ष भी खास
इस खोज से पहले उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के नरोरा क्षेत्र में स्थित वटवृक्ष को सबसे पुराना माना जाता था। भारतीय और रोमानियाई वैज्ञानिकों ने उसकी उम्र लगभग 450 से 500 वर्ष के बीच बताई थी। अब मुंगेर के वटवृक्ष की पहचान होने के बाद वह दूसरे स्थान पर आ गया है।
वहीं, तीसरे स्थान पर कोलकाता के आचार्य जगदीश चंद्र बोस बॉटनिकल गार्डन में स्थित प्रसिद्ध “ग्रेट बैनियन ट्री” है। इसकी उम्र करीब 250 से 350 वर्ष मानी जाती है। अपने विशाल फैलाव के कारण यह दुनिया के सबसे बड़े पेड़ों में भी गिना जाता है।
यह खोज न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण की आवश्यकता को भी उजागर करती है।

