Parliament March Protest: 20 जुलाई को आयोजित ‘संसद चलो मार्च’ के दौरान हुए घटनाक्रम के बाद दिल्ली सरकार ने प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन से जुड़ी दूसरी प्रमुख मांग पर भी सरकार ने कदम उठाते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने का आदेश जारी किया है। हालांकि, जिन लोगों की आपराधिक पृष्ठभूमि है, उन्हें इस राहत के दायरे से बाहर रखा गया है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के आधार पर लिया गया फैसला
दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने उपराज्यपाल की मंजूरी के बाद जारी आदेश में कहा कि मामले में दर्ज 13 एफआईआर और 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर विचार करने के बाद यह निर्णय लिया गया है। सरकार के अनुसार, शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ आगे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी और दर्ज मामलों को बंद करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। वहीं, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
सोनम वांगचुक और सीजेपी की मांग में था अंतर
आंदोलन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सरकार से केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को राहत देने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि हिंसा या जानबूझकर कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाले लोगों को इस राहत का लाभ नहीं मिलना चाहिए।
दूसरी ओर, आंदोलन का नेतृत्व कर रही सीजेपी ने सभी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई पूरी तरह समाप्त करने की मांग रखी थी। संगठन के पदाधिकारियों ने आपराधिक पृष्ठभूमि जैसी शर्तों का भी विरोध किया था और कहा था कि इससे पुलिस को मनमानी का अवसर मिल सकता है।
गिरफ्तार लोगों की होगी समीक्षा
सरकार ने बताया कि जिन प्रदर्शनकारियों को पहले गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया था, उनके मामलों की समीक्षा की जा रही है और पात्र लोगों की रिहाई की प्रक्रिया तेज की जाएगी। आदेश के अनुसार, भविष्य में भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ कोई नई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
सरकार के फैसले से स्पष्ट है कि सोनम वांगचुक की मांग के अनुरूप शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को राहत दी गई है, जबकि सीजेपी की बिना किसी शर्त राहत देने की मांग पूरी तरह स्वीकार नहीं की गई। वहीं, हिंसा, तोड़फोड़, पुलिस पर हमले या पहले से आपराधिक मामलों से जुड़े लोगों पर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।







