Gurugram Air Pollution: हरियाणा के गुरुग्राम में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। लोगों को जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर होना पड़ रहा है, लेकिन प्रदूषण रोकने के लिए जिम्मेदार विभागों की निगरानी और कार्रवाई के बावजूद नियमों का उल्लंघन जारी है। ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप)-2 लागू होने के बाद भी कई इलाकों में धूल और धुएं पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।
AQI 364 तक पहुंचा
शुक्रवार सुबह आठ बजे गुरुग्राम का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 364 दर्ज किया गया, जबकि मानेसर में यह 320 रहा। दोनों जगहों की हवा बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है। सुबह और शाम के समय प्रदूषण का असर अधिक महसूस किया जा रहा है। स्थानीय लोगों को आंखों में जलन, खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
निर्माण कार्यों पर रोक बेअसर
ग्रेप-2 के नियमों के तहत धूल फैलाने वाले निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध और निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय करना जरूरी है। इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में निर्माण गतिविधियां जारी हैं। सड़कों और अन्य स्थानों पर इंटरनेट केबल बिछाने के लिए खुदाई की जा रही है। निर्माण सामग्री खुले में रखी होने से हवा में धूल फैल रही है।
सफाई मशीनें भी खराब
शहर की टूटी और उखड़ी सड़कों से भी धूल उड़ रही है। सड़कों की मैकेनिकल सफाई के लिए कुल 22 मशीनें लगाई गई हैं, लेकिन इनमें से केवल सात ही काम कर रही हैं। बाकी मशीनों के खराब पड़े होने से सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। वाहनों के गुजरने पर सड़कों की धूल हवा में घुलकर प्रदूषण बढ़ा रही है।
तंदूर और वाहनों का धुआं
प्रदूषण बढ़ने की एक वजह ढाबों और रेस्टोरेंट में कोयले से जलने वाले तंदूर भी हैं। इसके अलावा सड़कों पर वाहनों की बढ़ती संख्या और उनसे निकलने वाला धुआं हवा की गुणवत्ता खराब कर रहा है। खुले में कूड़ा जलाने और निर्माण मलबे का उचित निस्तारण नहीं होने से भी समस्या गंभीर होती जा रही है।
दीवाली के बाद बढ़ा कूड़ा
दीवाली के त्योहार के बाद शहर की कई सड़कों और खाली प्लॉटों में कूड़ा और निर्माण मलबा जमा है। कई जगहों पर कूड़े में आग लगाई जा रही है, जिससे जहरीला धुआं वातावरण में फैल रहा है। वहीं, खुले में पड़े निर्माण मलबे के ऊपर से वाहन गुजरने पर धूल उड़ती है और आसपास के इलाकों में प्रदूषण बढ़ता है।
पीएम-2.5 और पीएम-10 का खतरा
हवा में मौजूद पीएम-2.5 कणों का आकार 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। ये सांस के जरिए फेफड़ों के अंदर तक पहुंच सकते हैं और रक्त प्रवाह में भी प्रवेश कर सकते हैं। वहीं, पीएम-10 कणों का आकार 10 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। ये नाक और श्वसन तंत्र में जमा होकर सांस संबंधी परेशानियां बढ़ा सकते हैं।
AQI की अलग-अलग श्रेणियां
वायु गुणवत्ता सूचकांक 0 से 50 तक रहने पर हवा अच्छी मानी जाती है। 51 से 100 संतोषजनक, 101 से 200 मध्यम और 201 से 300 खराब श्रेणी में आता है। 301 से 400 के बीच हवा बेहद खराब होती है, जबकि 401 से 500 तक पहुंचने पर इसे गंभीर श्रेणी में रखा जाता है। गुरुग्राम का AQI 364 होने का मतलब है कि लंबे समय तक ऐसी हवा में रहने से सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
कार्रवाई का दिया भरोसा
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, गुरुग्राम दक्षिण के क्षेत्रीय अधिकारी प्रवीण कुमार ने बताया कि प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। ग्रेप के नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है।



















