Lucknow Youth Russian Army:उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। नौकरी की तलाश में रूस गया एक युवक कथित तौर पर धोखाधड़ी का शिकार होकर रूसी सेना में भर्ती करा दिया गया। युवक की बहन ने आरोप लगाया है कि रोजगार दिलाने का झांसा देकर उसके भाई को सेना में शामिल कराया गया। अब परिवार उसकी सुरक्षित वापसी के लिए भारत सरकार से मदद मांग रहा है। परिवार का दावा है कि युवक मधुमेह से पीड़ित है और रूस में उसे न तो नियमित दवाएं मिल रही हैं और न ही पर्याप्त भोजन।
वर्किंग वीजा पर गया रूस
मामला लखनऊ के आशियाना स्थित कानपुर रोड का है। यहां के रहने वाले आशीष सिंह 8 जून को रोजगार की तलाश में रूस गए थे। उनकी बहन सुखमनी सिंह के मुताबिक, आशीष पंजाब के एक एजेंट के माध्यम से वर्किंग वीजा पर रूस पहुंचे थे। परिवार को उम्मीद थी कि वहां उन्हें नौकरी मिल जाएगी और वह अपना भविष्य बेहतर बना सकेंगे।
नौकरी का झांसा देकर धोखा
सुखमनी सिंह का आरोप है कि रूस पहुंचने के बाद आशीष की मुलाकात शुभम डाकुआ और एमबीबीएस के छात्र फहीम अख्तर से हुई। आरोप है कि फहीम ने उन्हें नौकरी दिलाने का भरोसा दिया, लेकिन इसके बजाय कथित तौर पर धोखाधड़ी करके रूसी सेना में भर्ती करा दिया।
परिवार का दावा है कि आशीष को रूस के ताइफुन कैंप में रखा गया है। वहां उन्हें ‘शेरखान’ उपनाम से बुलाया जाता है और युद्ध से संबंधित प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद से परिवार लगातार उनकी स्थिति को लेकर चिंतित है।
वीडियो कॉल पर बताई परेशानी
आशीष ने 8 और 21 अक्टूबर को वीडियो कॉल के माध्यम से अपने परिवार से संपर्क किया था। इस दौरान उन्होंने वहां की परिस्थितियों और अपनी परेशानियों के बारे में जानकारी दी। बहन सुखमनी के अनुसार, आशीष पहले से मधुमेह की बीमारी से पीड़ित हैं। इसके बावजूद उन्हें नियमित रूप से जरूरी दवाएं नहीं मिल पा रही हैं।
परिवार का यह भी आरोप है कि उन्हें पर्याप्त खाना नहीं दिया जा रहा है। दवाओं और भोजन की कमी के कारण उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही है। वीडियो कॉल पर भाई की स्थिति जानने के बाद परिवार की चिंता और बढ़ गई है। परिजन को आशंका है कि समय पर इलाज और जरूरी सुविधाएं नहीं मिलने से उनकी सेहत को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
PMO से लगाई मदद की गुहार
भाई को सुरक्षित भारत वापस लाने के लिए सुखमनी सिंह ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), विदेश मंत्रालय और मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास को पत्र भेजा है। उन्होंने अधिकारियों से पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और रूस में आशीष की मौजूदा स्थिति का पता लगाने की मांग की है।
परिवार ने अपील की है कि भारतीय अधिकारियों के माध्यम से आशीष को जरूरी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाए और उनकी सुरक्षित स्वदेश वापसी की व्यवस्था की जाए।
परिवार को वापसी का इंतजार
आशीष के परिजन अब भारत सरकार और विदेश मंत्रालय की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। परिवार की सबसे बड़ी चिंता उनकी बीमारी और रूस में मिल रही कथित सुविधाओं को लेकर है। परिजनों को उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी मामले को गंभीरता से लेते हुए रूसी अधिकारियों के साथ समन्वय करेंगे और आशीष को सुरक्षित भारत वापस लाने के लिए जरूरी कदम उठाएंगे।

















