PM Ujjwala Yojana: बिहार में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन पाने वाले लाखों परिवारों को बड़ा झटका लगा है। केंद्र सरकार ने सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या में कटौती कर दी है। अब लाभार्थियों को साल भर में केवल 4 सिलेंडरों पर ही सब्सिडी मिलेगी। पहले यह संख्या 9 थी। ऐसे में गरीब और मध्यम आय वाले परिवारों की रसोई का खर्च बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
गरीब परिवारों पर बढ़ेगा आर्थिक दबाव
इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन परिवारों पर पड़ेगा जो उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाली राहत पर निर्भर हैं। बिहार के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग इस योजना का लाभ लेते हैं। महंगाई पहले से ही लोगों के घरेलू बजट पर असर डाल रही है। अब सब्सिडी कम होने के बाद कई परिवारों को बाजार कीमत पर गैस सिलेंडर खरीदना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे घर के मासिक खर्च में बढ़ोतरी हो सकती है, खासकर उन परिवारों में जहां गैस की खपत अधिक है।
सरकार ने बताई फैसले की वजह
सरकार का कहना है कि यह निर्णय लाभार्थियों की औसत गैस खपत और सब्सिडी पर बढ़ते वित्तीय बोझ को ध्यान में रखकर लिया गया है। सरकार के अनुसार, योजना को अधिक संतुलित और व्यवहारिक बनाने के लिए यह बदलाव किया गया है। सरकार का तर्क है कि अधिकांश लाभार्थी साल भर में सीमित संख्या में ही गैस सिलेंडरों का उपयोग करते हैं। इसी आधार पर सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या कम करने का फैसला लिया गया है।
समय-समय पर बदला गया योजना का ढांचा
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत मई, 2016 में की गई थी। उस समय लाभार्थियों को साल में 12 गैस सिलेंडरों पर सब्सिडी का लाभ मिलता था। बाद में इस संख्या को घटाकर 9 कर दिया गया था। अब इसे और कम करके 4 कर दिया गया है।
इसके अलावा सरकार ने सब्सिडी व्यवस्था में भी कई बदलाव किए हैं। वर्ष 2022 में प्रति सिलेंडर 200 रुपये की सब्सिडी शुरू की गई थी। इसके बाद 2023 में इसे बढ़ाकर 300 रुपये प्रति सिलेंडर कर दिया गया। यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है।
बिहार में तेज हो सकती है राजनीतिक बहस
इस फैसले के बाद बिहार में राजनीतिक हलचल बढ़ने की संभावना है। विपक्षी दल इसे गरीबों के हितों के खिलाफ फैसला बताते हुए सरकार को घेर सकते हैं। वहीं, सरकार इस कदम को वित्तीय संतुलन और योजना के बेहतर संचालन से जोड़कर देख रही है।
लाभार्थियों में बढ़ी चिंता
सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या कम होने के बाद उज्ज्वला योजना से जुड़े लाखों परिवारों में चिंता का माहौल है। ग्रामीण इलाकों में लोग इसे अपने घरेलू खर्च से जुड़ा बड़ा मुद्दा मान रहे हैं। आने वाले समय में यह विषय सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन सकता है।


