Ujjwala Yojana:उज्ज्वला योजना शुरू होने पर सरकार ने हर गरीब परिवार को साल में 12 रियायती गैस सिलेंडर देने की बात कही थी। लेकिन समय के साथ यह संख्या लगातार घटती गई। अब सरकार ने इसे घटाकर सिर्फ 4 सिलेंडर सालाना कर दिया है। इस फैसले से देश के 10 करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों के बीच चर्चा तेज हो गई है।
क्यों लिया गया यह फैसला
सरकार का कहना है कि योजना पर लगातार बढ़ता खर्च इसकी सबसे बड़ी वजह है। वर्तमान में उज्ज्वला लाभार्थियों को हर गैस रीफिल पर 300 रुपये की सब्सिडी दी जाती है, जो सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाती है। पहले यह सब्सिडी 200 रुपये थी, जिसे बाद में बढ़ाया गया।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, एक गैस सिलेंडर तैयार करने और उपलब्ध कराने में सरकार का खर्च काफी अधिक आता है। गरीब परिवारों को सस्ती दर पर गैस देने के लिए सरकार को बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है। इसी कारण सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या कम करने का फैसला लिया गया है।
संसद में उठा मामला
लोकसभा में इस योजना को लेकर कई सवाल पूछे गए। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि मार्च 2026 तक देश में 10.56 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं। इनमें बड़ी संख्या अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति परिवारों की है।
उन्होंने यह भी बताया कि गैस की औसत खपत में बढ़ोतरी हुई है। साल 2021-22 में एक परिवार औसतन 3.68 सिलेंडर इस्तेमाल करता था, जबकि 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 4.80 सिलेंडर हो गई है।
कई चरणों में बढ़ा दायरा
सरकार ने पहले 8 करोड़ परिवारों तक गैस कनेक्शन पहुंचाने का लक्ष्य पूरा किया। इसके बाद उज्ज्वला 2.0 के तहत अतिरिक्त परिवारों को भी योजना से जोड़ा गया। अलग-अलग चरणों में लाखों नए कनेक्शन दिए गए और योजना का विस्तार देश के दूर-दराज इलाकों तक किया गया।
भारी खर्च बना चुनौती
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस योजना पर अब तक 1.14 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। इसमें मुफ्त कनेक्शन, सब्सिडी और तेल कंपनियों को दी गई सहायता शामिल है। पिछले कुछ वर्षों में ही हजारों करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजे गए हैं।
कम इस्तेमाल भी बना वजह
सरकार का कहना है कि ज्यादातर लाभार्थी साल में 9 सिलेंडर नहीं भरवा रहे थे। औसतन एक परिवार करीब 4 सिलेंडर ही इस्तेमाल कर रहा था। इसी आधार पर नया कोटा तय किया गया है।
फर्जी कनेक्शनों पर सख्ती
योजना में गड़बड़ियों को रोकने के लिए सरकार ने ई-केवाईसी अभियान चलाया। जांच के दौरान हजारों फर्जी कनेक्शन सामने आए, जिन्हें रद्द कर दिया गया। इससे योजना को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिली है।
एलपीजी उपयोग में बड़ा इजाफा
सरकार का दावा है कि उज्ज्वला योजना से करोड़ों महिलाओं को धुएं वाले चूल्हों से राहत मिली है। इससे स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को फायदा पहुंचा है। पिछले दस वर्षों में देश में एलपीजी की खपत और उपभोक्ताओं की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है।








