फ्रांस के प्रतिष्ठित गोंकूर साहित्य पुरस्कार की दौड़ में शामिल कनाडाई-हाईटियन लेखक थेलीसन ओरेलियन की किताब अब प्रतियोगिता से बाहर कर दी गई है। उनकी किताब ‘C’était ça ou mourir’ यानी ‘इट वाज दैट ऑर डाई’ पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लिखे जाने का आरोप लगा था। लेखक ने इस आरोप को खारिज किया है।
किताब पर कैसे उठा सवाल
ओरेलियन की पहली किताब को इस साल फ्रांस में काफी चर्चा मिली थी। किताब एक ऐसे शिक्षक की कहानी है, जो हैती में गैंग हिंसा से बचकर 12 देशों से होते हुए कनाडा पहुंचता है। फ्रांस में किताब की करीब 35 हजार प्रतियां बिक चुकी हैं और इसे कई साहित्यिक पुरस्कार भी मिल चुके हैं।
21 सितंबर को सोशल मीडिया पर ‘Balance ton Claude’ नाम के एक अकाउंट ने दावा किया कि किताब के कई हिस्सों को एआई जांच उपकरण से परखा गया और उनमें एआई के इस्तेमाल के संकेत मिले। इसके बाद मामला तेजी से फ्रांस के साहित्यिक जगत में चर्चा का विषय बन गया।
लेखक ने आरोप नकारे
38 वर्षीय ओरेलियन ने कहा कि उन्होंने किताब लिखने के लिए एआई का इस्तेमाल नहीं किया। उनका कहना है कि किताब का पहला ड्राफ्ट उन्होंने 2019 में तैयार किया था, जब आज के तरह जनरेटिव एआई टूल आम इस्तेमाल में नहीं थे। उन्होंने कहा कि उन्हें मशीन की मदद लेने की कोई जरूरत नहीं थी।
लेखक ने यह भी कहा कि उनकी भाषा और लेखन शैली में हैती और कैरेबियाई साहित्य की परंपराओं का प्रभाव है। उनके मुताबिक किताब में दोहराव, लय और बिंब उनकी अपनी लेखन शैली का हिस्सा हैं।
जांच में अलग नतीजे
इस विवाद में इस्तेमाल हुए एआई डिटेक्टर को लेकर भी सवाल उठे हैं। अलग-अलग संस्थानों और मीडिया संगठनों ने किताब के हिस्सों की जांच की तो सभी जगह एक जैसा नतीजा नहीं आया। कुछ जांचों में एआई इस्तेमाल की संभावना बताई गई, जबकि कुछ अन्य जांचों ने लेखन को इंसानी बताया।
विशेषज्ञों के मुताबिक एआई डिटेक्टर यह निश्चित रूप से नहीं बता सकते कि किसी पाठ को इंसान ने लिखा है या मशीन ने। ये उपकरण भाषा के पैटर्न और सांख्यिकीय संकेतों के आधार पर अनुमान लगाते हैं।
विवाद में नया मोड़
एआई आरोपों के साथ-साथ ओरेलियन की पुरानी लिखी सामग्री को लेकर नकल के आरोप भी सामने आए। फ्रांसीसी मीडिया में उनके पहले के कुछ लेखों में दूसरे स्रोतों से मिलती-जुलती सामग्री होने के दावे प्रकाशित हुए। ये आरोप उनकी मौजूदा किताब से अलग पुराने लेखन से जुड़े हैं।
इसके बाद गोंकूर अकादमी ने किताब को पुरस्कार की लंबी सूची से हटाने का फैसला किया। अकादमी ने कहा कि उसका फैसला पुरस्कार की साहित्यिक विश्वसनीयता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। उसने एआई से तैयार किए गए लेखन को स्वीकार नहीं करने की बात भी कही।
किताब को मिल चुके पुरस्कार
गोंकूर विवाद से पहले ओरेलियन की किताब को फ्रांस में कई पुरस्कार मिल चुके थे। इनमें Prix du Roman Fnac भी शामिल है। किताब को अन्य प्रमुख साहित्यिक पुरस्कारों की सूची में भी जगह मिली थी और इसके अनुवाद अधिकार करीब 20 देशों में बिकने की रिपोर्ट है।
अब यह मामला सिर्फ एक लेखक और एक किताब तक सीमित नहीं रहा है। इससे साहित्य में एआई के इस्तेमाल और एआई डिटेक्टर की विश्वसनीयता को लेकर भी नई बहस शुरू हो गई है।


