Akhilesh Yadav attack : उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार पर जमकर निशाना साधा। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि अयोध्या जाने का रिकॉर्ड बनाने के बाद भी मुख्यमंत्री के हिस्से में आखिरकार बदनामी ही आई। उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी तारीफ वाले विज्ञापनों पर हर दिन करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद सरकार को सम्मान नहीं, बल्कि अपयश मिल रहा है।
लखनऊ अग्निकांड पर सवाल
अखिलेश यादव ने लखनऊ अग्निकांड का जिक्र करते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इस घटना में अपना मासूम बच्चा खोने वाली एक मां के साथ मुख्यमंत्री के कथित व्यवहार का वीडियो जब लोगों ने देखा, तो पुराने मामले भी चर्चा में आ गए। अखिलेश ने दावा किया कि इस घटना ने उन पुराने वीडियो की याद दिला दी, जिनमें मुख्यमंत्री पर एक जिलाधिकारी और एक प्रोफेसर के साथ कथित तौर पर गलत भाषा इस्तेमाल करने के आरोप लगे थे।
अयोध्या मामले पर हमला
सपा प्रमुख ने अयोध्या का मुद्दा उठाते हुए भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार के समय राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे, चंदे और दान में चोरी जैसी घटनाएं सामने आईं। अखिलेश ने आरोप लगाया कि इन मामलों में आरोपित लोगों को बचाने के लिए बनाई गई एसआईटी पर लोगों को भरोसा नहीं था। उनके मुताबिक, बाद में दिल्ली को अपनी अलग एसआईटी बनानी पड़ी। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अगर कभी अकेले बैठकर गंभीरता से सोचेंगे तो उन्हें समझ आएगा कि उनका अपना प्रचार तंत्र ही उनके लिए नुकसान का कारण बन रहा है।
बूथ मजबूत करने पर जोर
लखनऊ स्थित सपा कार्यालय में हुई बैठक में अखिलेश यादव ने पार्टी की आगे की रणनीति पर भी बात की। उन्होंने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से कहा कि अगर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनानी है तो संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना होगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से साइकिल चुनाव चिन्ह के पक्ष में लोगों को मतदान के लिए तैयार करने का संकल्प लेने को कहा। साथ ही पार्टी जिस उम्मीदवार को टिकट दे, सभी कार्यकर्ताओं से उसके लिए पूरी मेहनत और एकजुट होकर काम करने की अपील की।
सोशल मीडिया पर संयम
अखिलेश ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर भी कार्यकर्ताओं को सावधान किया। उन्होंने कहा कि इंटरनेट पर अच्छी और उपयोगी जानकारी के साथ भ्रामक बातें भी तेजी से फैलती हैं। इसलिए कार्यकर्ताओं को किसी से बेवजह विवाद नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई गलत बात न तो बोलें और न ही सोशल मीडिया पर लिखें। खास तौर पर जाति और धर्म को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी से बचने की सलाह दी, ताकि पार्टी कार्यकर्ता अपनी भाषा और व्यवहार में संयम बनाए रखें।









