Allahabad High Court का बड़ा फैसला, कोविड ड्यूटी में जान गंवाने वाले हेड कांस्टेबल की पत्नी को मिलेंगे 50 लाख रुपये

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कोविड ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले हेड कांस्टेबल की पत्नी को 50 लाख रुपये देने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि जरूरी सेवाओं में लगे सभी सरकारी कर्मचारी कोविड ड्यूटी का हिस्सा माने जाएंगे।

Allahabad High Court Judgment: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने कोविड-19 महामारी के दौरान ड्यूटी करते हुए जान गंवाने वाले हेड कांस्टेबल बलवंत प्रताप के परिवार के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि दिवंगत हेड कांस्टेबल की पत्नी सीमा भारती को आठ सप्ताह के भीतर 50 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाए।

अदालत ने साफ कहा कि कोरोना महामारी के समय जरूरी सरकारी सेवाओं में काम करने वाले कर्मचारियों को भी कोविड ड्यूटी पर तैनात माना जाएगा। ऐसे कर्मचारियों को केवल इसलिए राहत से वंचित नहीं किया जा सकता कि वे अस्पताल में सीधे मरीजों का इलाज नहीं कर रहे थे।

सरकार का आदेश किया रद्द

सीमा भारती ने राज्य सरकार के 11 अप्रैल 2020 के शासनादेश के तहत अनुग्रह राशि की मांग की थी। लेकिन सरकार ने उनका दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि हेड कांस्टेबल बलवंत प्रताप कोविड मरीजों के इलाज या सीधे कोविड नियंत्रण की ड्यूटी में तैनात नहीं थे।

इस फैसले को चुनौती देते हुए मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा। न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति ए.के. चौधरी की पीठ ने राज्य सरकार के आदेश को रद्द कर दिया और कहा कि यह फैसला रिकॉर्ड में मौजूद तथ्यों के अनुरूप नहीं था।

रिकॉर्ड से साबित हुई कोविड ड्यूटी

अदालत ने सुनवाई के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी और पुलिस विभाग की ओर से जारी दस्तावेजों का अध्ययन किया। इन रिकॉर्ड से यह स्पष्ट हुआ कि बलवंत प्रताप को कोरोना संक्रमण की रोकथाम, लोगों को जागरूक करने और संक्रमित व्यक्तियों की मदद से जुड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं।

इसके अलावा पुलिस विभाग ने भी उनके परिवार को अनुग्रह राशि देने की सिफारिश की थी। अदालत ने माना कि उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड यह साबित करते हैं कि दिवंगत हेड कांस्टेबल कोविड ड्यूटी का हिस्सा थे।

जरूरी सेवाओं के कर्मचारियों को भी मिलेगा लाभ

हाई कोर्ट ने अपने पहले दिए गए फैसलों का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि कोविड ड्यूटी की परिभाषा केवल डॉक्टरों, नर्सों या अस्पताल में काम करने वाले कर्मचारियों तक सीमित नहीं हो सकती।

कोर्ट के अनुसार, महामारी के दौरान पुलिस, बिजली, जल आपूर्ति, टेलीफोन और अन्य जरूरी सरकारी सेवाओं में लगे कर्मचारी भी कोविड ड्यूटी निभा रहे थे। इन कर्मचारियों ने अपनी जिम्मेदारियों के जरिए महामारी के दौरान व्यवस्था बनाए रखने, लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संक्रमण को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे सभी कर्मचारियों को सरकार की अनुग्रह सहायता योजना का लाभ मिलना चाहिए, यदि उन्होंने ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवाई है।

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