Election Push: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी यूपी में अपनी पार्टी का आधार मजबूत करने की तैयारी में जुटे हैं। पार्टी ने चुनावी अभियान को विस्तार देने की रणनीति बनाई है। ओवैसी की बहराइच के मटेरा विधानसभा क्षेत्र में हुई सभा को यूपी चुनाव की तैयारियों के अहम पड़ाव के तौर पर देखा गया। यहां उन्होंने अपनी पार्टी की राजनीतिक हिस्सेदारी और नेतृत्व को लेकर जोरदार तरीके से अपनी बात रखी।
अवध से अभियान
AIMIM की रणनीति में अवध क्षेत्र को खास महत्व दिया जा रहा है। बहराइच से अभियान की शुरुआत ने संकेत दिया कि पार्टी मुस्लिम बहुल और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहती है। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली पहले ही संकेत दे चुके हैं कि AIMIM यूपी की करीब 200 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। पार्टी का कहना है कि जरूरत पड़ने पर वह दूसरे दलों के साथ गठबंधन पर भी विचार कर सकती है।
पश्चिमी यूपी पर नजर
अब ओवैसी की नजर पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर भी है। यहां कई विधानसभा क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाता चुनावी समीकरण को प्रभावित करने की स्थिति में हैं। पार्टी इन इलाकों में जनसभाओं और संगठनात्मक गतिविधियों के जरिए अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश कर सकती है। ओवैसी पहले ही यूपी के अलग-अलग हिस्सों में सक्रियता बढ़ा चुके हैं और सहारनपुर में भी उन्होंने बीजेपी सरकार के साथ-साथ समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए गठबंधन की संभावनाओं को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की थी।
सपा की बढ़ी चिंता
ओवैसी की सक्रियता से समाजवादी पार्टी के लिए भी नई चुनौती खड़ी हो सकती है। सपा का पारंपरिक मुस्लिम वोट बैंक यूपी की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जाता है और AIMIM के मैदान में उतरने से कुछ सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना बन सकती है। सपा नेताओं की ओर से पहले ही ओवैसी पर विपक्षी वोटों को बांटने के आरोप लगाए जा चुके हैं। वहीं AIMIM इन आरोपों को खारिज करते हुए खुद को राजनीतिक हिस्सेदारी और प्रतिनिधित्व की आवाज बताती रही है।
200 सीटों की तैयारी
AIMIM का दावा है कि वह यूपी में बड़े पैमाने पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। पार्टी प्रदेश नेतृत्व के मुताबिक करीब 200 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की योजना है। बहराइच की मटेरा सीट से शौकत अली को उम्मीदवार घोषित किया जाना भी इसी रणनीति का हिस्सा माना गया। इससे साफ है कि पार्टी सिर्फ कुछ चुनिंदा सीटों तक सीमित रहने के बजाय राज्य में व्यापक संगठन खड़ा करने की कोशिश कर रही है।
बदलेगा सियासी गणित?
2027 के चुनाव में AIMIM की सक्रियता यूपी के कई विधानसभा क्षेत्रों में मुकाबले का गणित बदल सकती है। हालांकि चुनाव में अभी समय है और पार्टी का वास्तविक प्रभाव मतदान के दौरान ही स्पष्ट होगा। फिलहाल ओवैसी का लगातार दौरा, जनसभाएं और उम्मीदवारों की घोषणा यह संकेत दे रही है कि AIMIM इस बार यूपी की सियासत में पहले की तुलना में ज्यादा आक्रामक तरीके से मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।









