Azamgarh Family Murder Case:आजमगढ़ में मंगलवार को पूजा के दौरान शुरू हुआ विवाद कुछ ही देर में एक भयावह हत्याकांड और बंधक संकट में बदल गया। पुलिस के मुताबिक, अरविंद सिंह ने विवाद के बाद अपनी पत्नी और अनुष्ठान कराने आए दो पुजारियों को गोली मार दी।
इसके बाद उसने अपने तीन बच्चों को घर के अंदर लेकर खुद को कमरे में बंद कर लिया। उसके पास लाइसेंसी रिवॉल्वर थी। बाहर पुलिस ने पूरे घर को घेर लिया और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए आरोपी से बातचीत शुरू की।
सात घंटे तक समझाया
पुलिस अधिकारियों ने आरोपी को समझाने और बच्चों को सुरक्षित बाहर भेजने की लगातार कोशिश की। करीब सात घंटे तक बातचीत चलती रही, लेकिन आरोपी किसी बात पर तैयार नहीं हुआ।
पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती तीनों बच्चों की सुरक्षा थी। किसी भी जल्दबाजी में कार्रवाई करने से बच्चों की जान खतरे में पड़ सकती थी। इसी वजह से टीम ने काफी देर तक बातचीत के जरिए स्थिति संभालने की कोशिश की।
बेटी को बनाया ढाल
पुलिस के मुताबिक, घर के अंदर आरोपी का करीब 10 साल का बेटा गोली लगने से घायल हो चुका था। इसी दौरान एक बच्ची उसके हाथ से नीचे गिर गई। बाद में आरोपी ने अपनी बड़ी बेटी को कथित तौर पर अपने सामने ढाल की तरह कर लिया।
इससे पुलिस के लिए ऑपरेशन और मुश्किल हो गया। अब सामने आरोपी के साथ मासूम बच्चे भी थे और किसी भी कार्रवाई में उन्हें नुकसान पहुंचने का खतरा था।
अंदर से चली गोलियां
करीब सात घंटे बाद अचानक घर के अंदर से गोली चलने की आवाज आई। इसके बाद पुलिस को लगा कि स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो रही है। टीम ने तत्काल घर में प्रवेश करने का ऑपरेशन शुरू किया।
पुलिस ने दरवाजा खोलने के लिए स्टन ग्रेनेड और टियर गैस का इस्तेमाल किया। इसके बाद टीम ने घर में प्रवेश किया।
पुलिस पर चार राउंड
एडीजी वाराणसी जोन नवीन अरोड़ा के मुताबिक, पुलिस टीम के अंदर पहुंचते ही आरोपी ने लगातार चार से पांच राउंड फायर किए। उसके पास छह राउंड वाली रिवॉल्वर थी और उसने सभी गोलियां चला दीं।
पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में तीन से चार राउंड फायर किए। इस दौरान आरोपी को गोली लगी और वह घायल हो गया। पुलिस ने उसे तत्काल इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया, जहां उसकी मौत हो गई।
बच्चों को निकाला बाहर
फायरिंग के दौरान पुलिस की प्राथमिकता बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना रही। गोली लगने से घायल बेटे को अस्पताल भेजा गया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। वहीं दोनों बेटियों को पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
पुलिस के मुताबिक, दोनों बच्चियां कई घंटे तक घर के अंदर रहने के कारण डिहाइड्रेशन और ट्रॉमा की स्थिति में थीं। उन्हें भी अस्पताल ले जाया गया। पूरे ऑपरेशन में किसी पुलिसकर्मी को गोली लगने की सूचना नहीं है।
आठ घंटे में चार मौतें
पूजा के दौरान शुरू हुआ विवाद करीब आठ घंटे के भीतर चार मौतों में बदल गया। पुलिस के अनुसार, शुरुआत में आरोपी की पत्नी और दो पुजारियों की हत्या हुई। इसके बाद आरोपी की गोली से उसका 10 साल का बेटा भी घायल हुआ और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
करीब सात घंटे की बातचीत के बाद घर के अंदर से फायरिंग शुरू हुई। पुलिस ने स्टन ग्रेनेड और टियर गैस के जरिए घर में प्रवेश किया और जवाबी फायरिंग में आरोपी घायल हुआ। अस्पताल में उसकी मौत के साथ ऑपरेशन खत्म हुआ।









