Bhadohi Renaming: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जिलों के नाम बदलने का मुद्दा चर्चा में आ गया है। वाराणसी में संत रविदास जयंती समारोह के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की कि भदोही जिले का नाम फिर से संत रविदास नगर किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फैसला संत रविदास के प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त करने के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने जिले का नाम बदलकर संत रविदास के सम्मान को ठेस पहुंचाई थी, जबकि उनकी सरकार महापुरुषों के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।
सपा पर साधा निशाना
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दल समाज को बांटने की राजनीति करते हैं, जबकि उनकी सरकार सामाजिक समरसता और संत-महापुरुषों की विरासत को सम्मान देने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि संत रविदास के नाम पर जिले का पुराना नाम बहाल करना केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक सम्मान से जुड़ा कदम है। इस घोषणा के बाद प्रदेश की राजनीति में नामकरण का मुद्दा फिर गर्मा गया।
अखिलेश यादव का पलटवार
मुख्यमंत्री की घोषणा के तुरंत बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों से प्रदेश में नाम बदलने की राजनीति की जा रही है और अब जनता इस राजनीति को समझ चुकी है। अखिलेश यादव ने कहा कि जो लोग भगवानों और ऐतिहासिक पहचान तक के नाम बदलने की बात करते हैं, उनसे जनता को ज्यादा उम्मीद नहीं है। उन्होंने दावा किया कि अब यह राजनीति ज्यादा दिन नहीं चलेगी और जनता वास्तविक मुद्दों के आधार पर फैसला करेगी।
नाम बदलने का इतिहास
भदोही जिला 30 जून 1994 को अस्तित्व में आया था। बाद में बहुजन समाज पार्टी की सरकार के दौरान इसका नाम बदलकर संत रविदास नगर कर दिया गया। वर्ष 2014 में समाजवादी पार्टी की सरकार ने जिले का नाम दोबारा भदोही कर दिया। अब योगी सरकार ने फिर से इसका नाम संत रविदास नगर करने की घोषणा की है। इस फैसले के बाद एक बार फिर प्रदेश में जिलों के नाम बदलने को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
सियासत हुई तेज
भदोही का नाम बदलने की घोषणा के बाद भाजपा और समाजवादी पार्टी आमने-सामने आ गई हैं। भाजपा इसे संत रविदास के सम्मान और सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर देख रही है, जबकि विपक्ष इसे नाम बदलने की राजनीति करार दे रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। फिलहाल सरकार के ऐलान ने उत्तर प्रदेश की सियासत में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।








