Devkinandan Thakur Statement: मथुरा में प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने सनातन धर्म पर हो रहे हमलों और हिंदुओं की वर्तमान स्थिति पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदू स्वभाव से अहिंसावादी है और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के सिद्धांत पर चलता है, लेकिन आत्मरक्षा उसका मौलिक अधिकार है। उन्होंने आगाह किया कि अत्यधिक सहनशीलता के कारण ही हमने अतीत में अपने कई महत्वपूर्ण भूभाग खो दिए हैं। ठाकुर ने रामायण और महाभारत का संदर्भ देते हुए समझाया कि हिंदू कभी संघर्ष की शुरुआत नहीं करता, परंतु जब बात परिवार, बहन-बेटी की अस्मत और धर्म की रक्षा पर आती है, तो शस्त्र उठाना अनिवार्य हो जाता है। उनके अनुसार, अब समय आ गया है कि हिंदू समाज अपनी सुरक्षा और अस्तित्व के प्रति सजग हो।
शांति और शक्ति का संतुलन: बुद्ध और युद्ध का देश
Devkinandan Thakur ने भारत की सांस्कृतिक पहचान को रेखांकित करते हुए कहा कि हमारा देश जितना ‘बुद्ध’ (शांति) का है, उतना ही ‘युद्ध’ (न्याय के लिए संघर्ष) का भी है। उन्होंने भगवान कृष्ण के शांति प्रयासों का उदाहरण देते हुए बताया कि महाभारत से पूर्व केवल पांच गांव मांगे गए थे। जब शांति के सभी विकल्प समाप्त हो गए और अन्याय की सीमा पार हो गई, तभी कुरुक्षेत्र के मैदान में शस्त्र उठाए गए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि:
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हिंदू धर्म कभी विस्तारवादी नहीं रहा और न ही किसी की जमीन छीनने की मंशा रखता है।
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लेकिन यदि हिंदू आस्था के केंद्रों, जैसे गाय, मंदिर या परिवार पर प्रहार होगा, तो मौन रहना संभव नहीं है।
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हिंदू देवी-देवता भी असुरों के विनाश और धर्म की स्थापना के लिए ही अवतार लेते हैं।
अतीत की गलतियों से सीख और भविष्य का आह्वान
कथावाचक ने भावुक होते हुए कहा कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे क्षेत्रों में हिंदुओं की घटती संख्या और अस्तित्व का संकट हमारी अत्यधिक सहनशीलता का परिणाम है। उन्होंने वर्तमान राजनीतिक बयानबाजी और मंदिरों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की।
Devkinandan Thakur ने समाज को जागृत करते हुए ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ (जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है) का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि ‘जियो और जीने दो’ हमारी नीति है, लेकिन अगर कोई हमें जीने ही न दे, तो प्रतिघात ही एकमात्र मार्ग बचता है। हिंदुत्व पर आक्रमण को उन्होंने पूरी मानवता पर प्रहार बताया, क्योंकि सनातन ही विश्व को शांतिपूर्ण जीवन की कला सिखाता है।




