Expressway Accident: भीषण सड़क दुर्घटना में तीन लोगों की मौत, कौन से पुराने दस्तावेजों ने खोली सुरक्षा व्यवस्था की पोल

लखनऊ आगरा एक्सप्रेसवे पर हुए भीषण सड़क हादसे में तीन लोगों की जान चली गई और कई लोग घायल हुए। घटना के बाद सामने आए दस्तावेजों ने सड़क सुरक्षा इंतजामों और लंबित सुधार योजनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Raises Serious Safety Questions: एक्सप्रेसवे पर हुआ एक दर्दनाक सड़क हादसा कई परिवारों के लिए कभी न भूलने वाला दुख बन गया। तेज रफ्तार कार एक कंटेनर से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और कंटेनर में फंस गई। इस हादसे में सीकर निवासी शंकरलाल, उनकी पत्नी प्रीति और बिहार के रहने वाले सुनील कुमार की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कार चला रहे शोएब को रास्ते में अचानक झपकी आ गई थी। बताया जा रहा है कि हादसे के समय कार की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है और कंटेनर चालक की तलाश जारी है।

हादसे के बाद सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

इस दुर्घटना के बाद कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने सड़क सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, एक्सप्रेसवे पर होने वाले हादसों के आंकड़े पहले से संबंधित विभाग के पास मौजूद थे, लेकिन जरूरी कदम समय पर नहीं उठाए गए। बताया गया है कि नवंबर 2025 में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाओं से जुड़े आंकड़ों की समीक्षा की गई थी। दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2021 से 2025 के बीच इस मार्ग पर 7,024 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं।

झपकी और थकान बना बड़ा कारण

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कुल दुर्घटनाओं में से 54.7 प्रतिशत हादसे चालक की थकान या झपकी आने के कारण हुए। यह आंकड़ा सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है। इसके अलावा लगभग 70 प्रतिशत सड़क हादसे रात 12 बजे से सुबह 8 बजे के बीच हुए। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि रात के समय वाहन चलाने वालों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की जरूरत है।

कई प्रस्ताव बने, लेकिन लागू नहीं हुए

दस्तावेजों से यह भी जानकारी सामने आई कि वर्ष 2019 के बाद इस एक्सप्रेसवे का स्वतंत्र सड़क सुरक्षा ऑडिट नहीं कराया गया। जबकि इस दौरान वाहनों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई।

बैठक में रात के समय गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा से घटाकर 75 से 80 किलोमीटर प्रति घंटा करने, ड्रोन निगरानी शुरू करने और यात्रियों के लिए बेहतर विश्राम सुविधाएं उपलब्ध कराने जैसे कई सुझाव दिए गए थे। इसके अलावा चालकों के लिए सस्ती चाय और भोजन जैसी सुविधाओं का प्रस्ताव भी रखा गया था, ताकि लंबे सफर के दौरान थकान कम हो सके। हालांकि, इन योजनाओं का पूरी तरह क्रियान्वयन नहीं हो सका।

सड़क सुरक्षा को लेकर उठी नई मांग

हादसे के बाद सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा है। इसमें 30 दिनों के भीतर सड़क सुरक्षा उपायों की स्थिति पर सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करने की मांग की गई है। साथ ही रात के समय गति सीमा को तत्काल प्रभाव से 80 किलोमीटर प्रति घंटा करने की भी मांग उठाई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाएं तो ऐसी कई दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।

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