Decision of Faith and Self-Respect:अयोध्या में तैनात राज्यकर विभाग के संभागीय उप आयुक्त (जीएसटी डिप्टी कमिश्नर) प्रशांत कुमार सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका यह कदम धार्मिक गुरु शंकराचार्य द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की गई टिप्पणी के विरोध के रूप में देखा जा रहा है। इस फैसले के बाद अयोध्या ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
पोस्टिंग और जिम्मेदारी
प्रशांत कुमार सिंह की अयोध्या में पोस्टिंग साल 2023 में हुई थी। वह राज्यकर विभाग में संभागीय उप आयुक्त के पद पर कार्यरत थे और उन्हें एक मेहनती व ईमानदार अधिकारी के रूप में जाना जाता था। विभागीय कामकाज में उनकी सक्रिय भूमिका रही है और अधिकारियों के बीच उनकी छवि एक जिम्मेदार लोक सेवक की थी।
इस्तीफे की वजह क्या बताई
अपने इस्तीफे में प्रशांत कुमार सिंह ने साफ लिखा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनके लिए केवल एक प्रशासक नहीं हैं, बल्कि एक संन्यासी और करोड़ों लोगों की आस्था के प्रतीक हैं। उनके अनुसार, शंकराचार्य जैसे प्रतिष्ठित धार्मिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा मर्यादा की सीमाएं पार कर की गई टिप्पणी से उन्हें गहरी मानसिक पीड़ा पहुंची। उन्होंने कहा कि वह एक लोक सेवक जरूर हैं, लेकिन अपने आदर्श का अपमान होते हुए चुप नहीं रह सकते थे।
मानसिक तनाव और निजी फैसला
प्रशांत कुमार सिंह ने यह भी बताया कि इस पूरे घटनाक्रम के बाद वह पिछले तीन दिनों से मानसिक तनाव में थे। उन्होंने कहा कि जिस तरह यूजीसी के नाम पर राजनीति की जा रही है, उससे भी उन्हें दुख हुआ। इसी भावनात्मक और वैचारिक स्थिति के चलते उन्होंने यह कदम उठाने का फैसला किया। उन्होंने साफ किया कि उन पर किसी भी तरह का दबाव नहीं था और यह निर्णय उन्होंने पूरी तरह अपने स्वाभिमान और सोच के आधार पर लिया है।
आगे क्या करेंगे
इस्तीफा देने के बाद प्रशांत कुमार सिंह ने कहा कि जैसे ही उनका इस्तीफा स्वीकार किया जाएगा, वह समाज सेवा के कामों में लग जाएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह सामाजिक कार्यों के लिए अपने निजी संसाधनों का उपयोग करेंगे। उनका मानना है कि समाज के लिए सकारात्मक योगदान देना ही इस समय उनका अगला उद्देश्य है।
प्रशासनिक हलकों में चर्चा
इस इस्तीफे के बाद अयोध्या सहित पूरे उत्तर प्रदेश में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। लोग इसे आस्था, विचार और व्यक्तिगत स्वाभिमान से जुड़ा फैसला मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे प्रशासनिक व्यवस्था से जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल यह मामला राज्य की राजनीति और प्रशासन दोनों में चर्चा का विषय बना हुआ है।







