उत्तर प्रदेश का औद्योगिक शहर कानपुर, जिसे कभी ‘मैनचेस्टर ऑफ इंडिया’ के नाम से जाना जाता था, अब आधुनिक विकास की नई पहचान गढ़ रहा है। चमड़ा उद्योग और अपने खास ‘कानपुरिया’ अंदाज के लिए प्रसिद्ध यह शहर अब मेट्रो, डिफेंस कॉरिडोर, रिंग रोड और बड़े ऊर्जा प्रोजेक्ट्स के जरिए प्रदेश के प्रमुख ग्रोथ इंजन के रूप में उभर रहा है।
मेट्रो और रिंग रोड से बदलेगी शहर की तस्वीर
कानपुर लंबे समय से ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझता रहा है। इसे दूर करने के लिए करीब 11 हजार करोड़ रुपये की लागत से 32 किलोमीटर लंबा मेट्रो नेटवर्क विकसित किया जा रहा है। आईआईटी कानपुर से मोतीझील तक का पहला चरण शुरू हो चुका है और इसे देश के सबसे तेजी से पूरे हुए मेट्रो प्रोजेक्ट्स में गिना जा रहा है।
इसके अलावा 93 किलोमीटर लंबी रिंग रोड परियोजना पर भी काम जारी है। इसके पूरा होने के बाद भारी वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश करने की जरूरत नहीं होगी, जिससे ट्रैफिक जाम और प्रदूषण दोनों में कमी आने की उम्मीद है।
डिफेंस कॉरिडोर से बढ़ेगा रोजगार
उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर में कानपुर को अहम नोड के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां निजी क्षेत्र की बड़ी रक्षा निर्माण इकाइयों की स्थापना हो रही है। इससे रक्षा उपकरणों के उत्पादन के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी तैयार होंगे।
ऊर्जा परियोजनाओं से मिलेगी मजबूती
पनकी और घाटमपुर में विकसित हो रहे थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स के जरिए बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है। इन परियोजनाओं से प्रदेश की बिजली जरूरतों को पूरा करने के साथ औद्योगिक विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।
चमड़ा उद्योग अब भी पहचान का आधार
कानपुर का चमड़ा उद्योग आज भी देश के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों में शामिल है। यहां निर्मित चमड़े और चमड़े के उत्पादों की मांग अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व सहित कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बनी हुई है। यह उद्योग हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है।
‘मुन्ना समोसा’ भी बना शहर की ब्रांड पहचान
कानपुर केवल उद्योगों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने खान-पान के लिए भी प्रसिद्ध है। ‘मुन्ना समोसा’ शहर की ऐसी पहचान बन चुका है, जिसे ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) जैसी पहल के जरिए भी नई पहचान मिली है। यह स्थानीय स्वाद और उद्यमिता का प्रतीक माना जाता है।