Political Twist: कौशल किशोर के सपा में जाने की चर्चा तेज, 13 सितंबर की बैठक पर टिकीं सबकी निगाहें

यूपी की सियासत में बीजेपी नेता कौशल किशोर की नाराजगी चर्चा में है। उनके सपा में जाने के कयास लगाए जा रहे हैं। अब 13 सितंबर की बैठक को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में फिलहाल भले ही सबकुछ शांत दिखाई दे रहा हो, लेकिन अंदरखाने हलचल तेज है। इसी बीच बीजेपी के बड़े दलित नेताओं में शामिल कौशल किशोर को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। अटकलें हैं कि वह बीजेपी का साथ छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम सकते हैं। हालांकि अभी तक उनके पार्टी छोड़ने को लेकर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। कौशल किशोर पूर्व सांसद होने के साथ केंद्र सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।

नाराजगी की वजह

कौशल किशोर की नाराजगी को लेकर कई कारणों की चर्चा है। उनकी पत्नी जयदेवी कौशल मलिहाबाद से बीजेपी विधायक हैं। कुछ समय पहले उन्होंने लखनऊ के एक मंदिर में पूजा करने से रोके जाने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि दलित समाज से होने के कारण उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया। बीजेपी की ओर से इस मामले को खारिज करते हुए घटना की निंदा की गई थी। इसके अलावा पार्टी में उनकी पत्नी के आगामी चुनावी टिकट को लेकर चल रही चर्चाओं से भी कौशल किशोर के नाराज होने की बात कही जा रही है।

संगठन से भी दूरी

पार्टी संगठन में हालिया बदलावों के दौरान कौशल किशोर को कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिलने की बात भी सामने आई है। माना जा रहा है कि इससे उनकी नाराजगी और बढ़ी। हालांकि उनकी मौजूदा राजनीतिक स्थिति को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि उनकी नाराजगी सीधे पार्टी छोड़ने के फैसले तक पहुंच चुकी है। फिलहाल उनके बयानों और राजनीतिक गतिविधियों पर सबकी नजर बनी हुई है।

ट्वीट से बढ़े कयास

कौशल किशोर के हालिया सोशल मीडिया पोस्ट ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है। एक पोस्ट में उन्होंने एक मित्र से हुई बातचीत का जिक्र करते हुए लिखा कि गेंद जितनी ऊपर जानी थी, जा चुकी है और अब तेजी से नीचे आ रही है। उनके इस बयान को राजनीतिक विश्लेषकों और समर्थकों के एक वर्ग ने बीजेपी के राजनीतिक ग्राफ से जोड़कर देखा। हालांकि कौशल किशोर ने इस पोस्ट में सीधे तौर पर बीजेपी का नाम नहीं लिया।

विचारधारा पर सवाल

एक अन्य पोस्ट में कौशल किशोर ने लिखा कि जब कोई संगठन या आंदोलन अपने मूल सिद्धांतों से भटक जाता है, तो वह वहीं पहुंच जाता है जहां से उसने शुरुआत की थी। उन्होंने यह भी कहा कि विचारधारा से जुड़े लोगों का विश्वास टूटने लगता है और वसूलों से टकराने से बचना चाहिए। उनके इस बयान को बीजेपी की कार्यशैली पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी के तौर पर देखा जा रहा है। यही वजह है कि उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

13 सितंबर पर नजर

अगर कौशल किशोर समाजवादी पार्टी में जाते हैं तो इसका असर अवध क्षेत्र की राजनीति पर पड़ सकता है। खासकर मोहनलालगंज और आसपास के इलाकों में उनके राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए बीजेपी के लिए यह चुनौती बन सकती है। दूसरी तरफ, सपा के लिए उनका साथ दलित और पासी समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने का मौका हो सकता है। फिलहाल सबसे अहम तारीख 13 सितंबर मानी जा रही है। कौशल किशोर ने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई है। अब देखना होगा कि इस बैठक में वह कोई बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हैं या बीजेपी के साथ ही बने रहते हैं।

Exit mobile version