KGMU conversion case: लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में हिंदू महिला रेजिडेंट डॉक्टरों के धर्मांतरण और यौन शोषण के मामले ने अब एक बेहद गंभीर और अंतरराष्ट्रीय रूप ले लिया है। मुख्य आरोपी डॉ. रमीज मलिक की गिरफ्तारी के बाद यूपी एटीएस ने इस जांच की कमान संभाल ली है। जांच में खुलासा हुआ है कि रमीज का संबंध दिल्ली ब्लास्ट केस की आरोपी डॉ. शाहीन सईद से था और वह एक सुनियोजित ‘लव जिहाद’ नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। रमीज की फरारी के दौरान सहारनपुर, मेरठ और मुजफ्फरनगर जैसे शहरों से मिली मदद और उसकी संदिग्ध विदेश यात्राओं ने विदेशी फंडिंग के कनेक्शन की ओर इशारा किया है। अब जांच एजेंसियां संस्थान के भीतर मौजूद उन सफेदपोश मददगारों और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों को खंगाल रही हैं, जो इस धर्मांतरण सिंडिकेट को संरक्षण दे रहे थे।
डॉ. रमीज मलिक का ‘आतंक’ कनेक्शन और एटीएस की सक्रियता
लखनऊ पुलिस की शुरुआती जांच में मिले चौंकाने वाले इनपुट्स के बाद उत्तर प्रदेश एटीएस ने पूरे नेटवर्क की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। डॉ. रमीज मलिक ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि वह दिल्ली ब्लास्ट मामले में शामिल रही डॉ. शाहीन सईद के संपर्क में था। दोनों की मुलाकातें मेडिकल कॉन्फ्रेंस के दौरान हुईं, जो बाद में गहरे संपर्कों में बदल गईं। एटीएस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या रमीज किसी बड़े कट्टरपंथी संगठन के इशारे पर चिकित्सा संस्थानों में हिंदू महिला डॉक्टरों को निशाना बना रहा था।
चार शहरों का नेटवर्क और विदेशी फंडिंग की आशंका
जांच में सामने आया है कि रमीज की जड़ें सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं थीं। एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान उसने आगरा में एक हिंदू लड़की का धर्मांतरण कराकर निकाह किया था, जिसकी प्रक्रिया पीलीभीत में पूरी की गई थी। इसके अलावा, अपनी फरारी के दौरान उसने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, मेरठ, शाहजहांपुर और मुजफ्फरनगर में शरण ली। इन शहरों के कई डॉक्टरों ने उसे न केवल छिपने में मदद की बल्कि कानूनी सलाह भी मुहैया कराई। पुलिस अब उसकी विदेश यात्राओं का ब्यौरा जुटा रही है, क्योंकि संदेह है कि इस धर्मांतरण सिंडिकेट को चलाने के लिए बाहर से आर्थिक मदद मिल रही थी।
संस्थान के भीतर ‘तकरीर’ और धर्मांतरण की पाठशाला
KGMU के भीतर की स्थिति और भी भयावह बताई जा रही है। रमीज के एक करीबी जूनियर डॉक्टर का नाम सामने आया है, जो हॉस्टल में नियमित रूप से ‘तकरीरें’ (धार्मिक व्याख्यान) आयोजित करवाता था। इन तकरीरों का मुख्य उद्देश्य रेजिडेंट डॉक्टरों का ब्रेनवॉश करना था। पुलिस के रडार पर वर्तमान में केजीएमयू की दो महिला स्टाफ और एक डॉक्टर हैं, जो कथित तौर पर इस रैकेट में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।
प्रशासन की भूमिका पर उठते सवाल
इस पूरे प्रकरण ने KGMU प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि महिला डॉक्टरों ने पहले भी इसकी शिकायत की थी, लेकिन उसे दबा दिया गया। अब जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या संस्थान के कुछ विभागाध्यक्षों (HoDs) ने भी रमीज को संरक्षण दिया था। फिलहाल, एजेंसियां उस ‘मास्टरमाइंड’ की तलाश में हैं जो इस पूरे लव जिहाद नेटवर्क का संचालन कर रहा है।







