Lucknow News:राजधानी लखनऊ में कृषि भूमि की खरीद-बिक्री करने वालों के लिए बड़ी खबर है। जिला प्रशासन ने शहरी क्षेत्र को छोड़कर जिले के 332 गांवों में कृषि योग्य भूमि के डीएम सर्किल रेट में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्तावित संशोधन के तहत कई गांवों में सर्किल रेट में 100 प्रतिशत से लेकर 200 प्रतिशत तक की वृद्धि की जाएगी। आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नई दरें 4 जून से प्रभावी कर दी जाएंगी।
नई दरें लागू होने के बाद जिन गांवों में कृषि भूमि का डीएम सर्किल रेट वर्तमान में 20 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर है, वहां यह बढ़कर 35 से 40 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकता है। इससे जमीन की रजिस्ट्री और अन्य राजस्व संबंधी प्रक्रियाओं पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।
अगस्त 2025 में भी बढ़े थे सर्किल रेट
गौरतलब है कि लखनऊ में पिछली बार 1 अगस्त 2025 को नए डीएम सर्किल रेट लागू किए गए थे। उस समय शहर और गांव दोनों क्षेत्रों में कृषि, आवासीय तथा व्यावसायिक भूमि के सर्किल रेट में 25 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक वृद्धि की गई थी। अब जिला प्रशासन ने केवल ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि योग्य भूमि की दरों में संशोधन का निर्णय लिया है।
प्रस्ताव के अनुसार मोहनलालगंज तहसील के 161 गांवों, सरोजनीनगर के 52 गांवों, बख्शी का तालाब के 95 गांवों, मलिहाबाद के 13 गांवों तथा सदर क्षेत्र के 6 गांवों की कृषि भूमि के सर्किल रेट बढ़ाए जाएंगे।
बाजार मूल्य और सर्किल रेट में था बड़ा अंतर
जिलाधिकारी विशाख जी ने बताया कि लखनऊ विकास प्राधिकरण के विस्तारित क्षेत्र और नगर निगम सीमा में शामिल गांवों को छोड़कर शेष 332 गांवों में कृषि भूमि के सर्किल रेट में संशोधन किया जा रहा है। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) राकेश कुमार सिंह के अनुसार प्रस्तावित दरों पर 2 जून तक आपत्तियां दर्ज कराई जा सकती हैं।
उन्होंने बताया कि उपजिलाधिकारियों और उपनिबंधकों द्वारा किए गए सर्वे में पाया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि का बाजार मूल्य और डीएम सर्किल रेट के बीच काफी अंतर है। वहीं अकृषक भूमि की बाजार दरें और सर्किल रेट लगभग समान पाए गए।
चार श्रेणियों में तय की गई नई दरें
जिला प्रशासन ने कृषि भूमि को चार श्रेणियों में विभाजित कर नई दरें तय की हैं। इनमें जनपदीय मार्ग के आसपास की भूमि, संपर्क मार्ग से जुड़ी भूमि, आबादी से सटी भूमि तथा सामान्य कृषि भूमि शामिल हैं। प्रत्येक श्रेणी की भूमि के बाजार मूल्य के अनुसार सर्किल रेट बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है।
प्रशासन का मानना है कि नई दरें लागू होने से जमीनों का मूल्यांकन अधिक वास्तविक होगा और बाजार दरों तथा सरकारी दरों के बीच मौजूद अंतर को कम किया जा सकेगा।
