Lucknow Fire Tragedy: लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक व्यावसायिक इमारत में लगी भीषण आग ने 15 लोगों की जान ले ली। इस हादसे में कई लोग घायल भी हुए। आग से बचकर निकले मोहम्मद आसिफ ने उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए बताया कि कुछ ही मिनटों में हालात इतने खराब हो गए थे कि लोगों के पास अपनी जान बचाने के लिए कूदने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था।
लंच के दौरान मचा हड़कंप
आसिफ इमारत की दूसरी मंजिल पर स्थित एक एनीमेशन सेंटर में काम करते थे। उन्होंने बताया कि सोमवार दोपहर करीब दो बजे सभी कर्मचारी लंच कर रहे थे। तभी किसी ने कहा कि बिल्डिंग में कोई समस्या है और सभी लोग बाहर निकल जाएं। हालांकि किसी ने यह नहीं बताया कि इमारत में आग लग चुकी है। आसिफ के मुताबिक, शुरुआत में सभी को लगा कि शायद मामूली शॉर्ट सर्किट हुआ होगा, क्योंकि पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी थीं। लेकिन कुछ ही देर में हालात पूरी तरह बदल गए।
बायोमेट्रिक लॉक बना मुसीबत
आसिफ ने बताया कि बाहर निकलने के लिए उन्होंने बायोमेट्रिक लॉक खोलने की कोशिश की, लेकिन बिजली चली जाने के कारण सिस्टम काम नहीं कर रहा था। इसी बीच पूरे ऑफिस में तेजी से धुआं भरने लगा। उन्होंने कहा कि जब वे सीढ़ियों की तरफ बढ़े तो वहां भी घना धुआं था। दूसरी तरफ जाने पर भी यही स्थिति थी। कुछ ही मिनटों में ऐसा माहौल बन गया कि पास खड़ा व्यक्ति भी दिखाई नहीं दे रहा था।
खिड़की तोड़ी और कूदने का फैसला किया
जान बचाने के लिए आसिफ ने एक डेस्क उठाकर कांच की खिड़की तोड़ने की कोशिश की। सांस लेने में दिक्कत होने लगी तो उन्होंने गीले तौलिए से अपना चेहरा ढक लिया। खिड़की टूटने के बाद बाहर आग की लपटें दिखाई दीं। नीचे मौजूद लोग लगातार कूदने के लिए कह रहे थे। आसिफ ने बताया कि उनके सामने बिजली का तार भी था। उन्हें यह भी नहीं पता था कि उसमें करंट है या नहीं, लेकिन अंदर रहना मौत को बुलाने जैसा था। इसलिए उन्होंने कूदने का फैसला किया।
कई लोग घायल हुए
कूदने के दौरान आसिफ को गंभीर चोटें आईं। उनके दोनों हाथ और शरीर के कई हिस्से झुलस गए। उन्होंने बताया कि उनके बाद चार-पांच अन्य लोग भी नीचे कूदे। उनके साथी जयंत गुप्ता भी जान बचाने के लिए कूदे, लेकिन लोहे की रेलिंग पर गिरने से गंभीर रूप से घायल हो गए।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
आसिफ ने दावा किया कि इमारत में पर्याप्त अग्नि सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने कहा कि आग लगने पर बजने वाला कोई अलार्म नहीं था। साथ ही छत पर जाने का रास्ता भी बंद था। उनका मानना है कि यदि छत तक पहुंचने का रास्ता खुला होता तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि आग भूतल पर स्थित पालतू जानवरों के क्लिनिक से शुरू हुई होगी, जहां कई एयर कंडीशनर और ज्वलनशील सामान रखा हुआ था। हालांकि इस दावे की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जांच जारी
अधिकारियों के अनुसार, उषा मेहता मार्ग स्थित तीन मंजिला इमारत में लगी इस आग में 15 लोगों की मौत हुई है। राज्य सरकार ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। हादसे के कारणों और सुरक्षा व्यवस्था में हुई लापरवाही की जांच की जा रही है।







